“ना दिखावा,ना देर रात बारात” रानी बडौद की इस शादी ने बदली परंपरा,बना दी नई मिसाल
शाजापुर - जिले के ग्राम रानी बडौद में मंगलवार को आयोजित एक विवाह समारोह ने पारंपरिक शादियों की सोच को नई दिशा देते हुए समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। शिक्षक हुकम सिंह राजपूत की पुत्री का यह विवाह अब पूरे क्षेत्र में “आदर्श शादी” के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
समय पर बारात,ससम्मान आयोजन जहां आमतौर पर बारात देर रात पहुंचती है और अव्यवस्था का माहौल बनता है, वहीं इस विवाह में बारात शाम 6 बजे ही गांव पहुंच गई। महज डेढ़ घंटे में, रात 7:30 बजे दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर पहुंच गए। समय की पाबंदी और सुव्यवस्थित आयोजन ने सभी मेहमानों का दिल जीत लिया।
दहेज नहीं, समझदारी का तोहफा
इस शादी में दहेज को लेकर भी एक सराहनीय पहल देखने को मिली। फर्नीचर, बर्तन और अन्य सामान देने की परंपरा को छोड़ते हुए, दोनों परिवारों ने मिलकर 5 लाख रुपए का चेक नवदंपति को भेंट किया। यह कदम न केवल फिजूलखर्ची को रोकने वाला है, बल्कि नवदंपति को अपनी जरूरत के अनुसार भविष्य संवारने की आज़ादी भी देता है।
दोनों परिवारों की पहल बनी प्रेरणा
ग्राम आलनिया से डॉक्टर दिलीप सिंह राजपूत के पुत्र मनीष राजपूत की बारात आई। दोनों समधियों की आपसी समझ, सहमति और सकारात्मक सोच ने इस बदलाव को संभव बनाया, जो अब समाज के लिए प्रेरणा बन रही है।
संतों का आशीर्वाद, हजारों की मौजूदगी
विवाह समारोह में संतों का आगमन भी विशेष आकर्षण रहा। महामंडलेश्वर श्रृंगारपूर बालाजी धाम के महंत श्यामदास महाराज सहित अन्य संतों ने नवदंपति को आशीर्वाद प्रदान किया। साथ ही,हजारों की संख्या में समाजजन और अतिथि शामिल हुए और वर-वधू को शुभकामनाएं दीं।
समाज के लिए बना प्रेरणादायक संदेश रानी बडौद का यह विवाह अब एक सशक्त संदेश बनकर उभरा है— “शादी में दिखावा नहीं, समझदारी और सादगी ही असली परंपरा है।” यह आयोजन आने वाले समय में समाज में सकारात्मक बदलाव की नई शुरुआत साबित हो सकता है।
रिपोर्टर - रमेश राजपूत


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