कथित गौकशी की घटना घर के अंदर होने से सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ा : हाईकोर्ट

शामली : जनपद के मोहल्ला काजीवाड़ा में वर्ष 2025 में सामने आए कथित गौकशी प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी समीर पुत्र समीम पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) को निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कथित घटना एक मकान के अंदर हुई थी तथा उपलब्ध अभिलेखों से यह स्पष्ट नहीं होता कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था अथवा सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हुआ हो।

मामले के अनुसार 23 अप्रैल 2025 को समीर के खिलाफ गौकशी का मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में 21 जुलाई 2025 को जिला प्रशासन द्वारा उस पर एनएसए की कार्रवाई की गई। समीर ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी घटना को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने हेतु उसके प्रभाव का व्यापक होना आवश्यक है। न्यायालय के अनुसार कथित घटना घर के अंदर हुई थी और इससे कानून-व्यवस्था या सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का पर्याप्त आधार रिकॉर्ड पर नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने एनएसए की कार्रवाई को निरस्त कर दिया।
प्रकरण में ईशान पुत्र समीम, सलमान पुत्र रफीक तथा अब्दुल पुत्र खुर्शीद के नाम भी सामने आए थे। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। वहीं आरोपियों के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए न्यायालय का रुख किया था। परिजनों का आरोप है कि उनके खिलाफ की गई कुछ पुलिस कार्रवाइयाँ तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं।
मामले में पुलिस और आरोपियों के परिजनों के दावे अलग-अलग हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में मुख्य रूप से एनएसए लगाए जाने के औचित्य पर विचार किया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उसे निरस्त कर दिया। बताया जाता है कि मामले के कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि कुछ अन्य संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है।
मामला जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है तथा हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और एनएसए के प्रयोग को लेकर बहस शुरू हो गई है।

रिपोर्टर : अविनाश शर्मा 

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