1980 के कृषि भूमि आवंटियों को संक्रमणीय भूमिधर का दर्जा देने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
शामली - जनपद के ऊन तहसील क्षेत्र के ग्राम ताना के किसानों को वर्ष 1980 में आवंटित कृषि भूमि पर अब तक संक्रमणीय भूमिधर का दर्जा न मिलने का मामला एक बार फिर उठाया गया है। बहुजन एकता संघर्ष समिति ने इस संबंध में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी शामली को ज्ञापन भेजकर पात्र किसानों को शीघ्र कानूनी अधिकार प्रदान करने की मांग की है। समिति के अनुसार ग्राम ताना, थाना गढ़ीपुख्ता के भूमिहीन किसानों को 28 दिसंबर 1980 को कृषि भूमि का आवंटन किया गया था। आवंटन के बाद से किसान लगातार उक्त भूमि पर खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं, लेकिन करीब चार दशक बीत जाने के बावजूद उन्हें संक्रमणीय भूमिधर का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। संगठन का कहना है कि निर्धारित अवधि के बाद भूमि आवंटियों को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किए जाने का प्रावधान है, लेकिन संबंधित किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला। इसके कारण किसानों को भूमि के क्रय-विक्रय, नामांतरण तथा अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बहुजन एकता संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और अब इसका समाधान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि वर्ष 1980 में भूमि आवंटन प्राप्त करने वाले सभी पात्र किसानों को संक्रमणीय भूमिधर का दर्जा देकर उन्हें भूमि पर पूर्ण कानूनी अधिकार प्रदान किए जाएं, जिससे उनकी आजीविका और भविष्य सुरक्षित हो सके। ज्ञापन भेजे जाने के बाद क्षेत्र के किसानों में उम्मीद जगी है कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
रिपोर्टर – अविनाश शर्मा
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