नगर पालिका कार्यालय में ‘हमले’ के बाद मचा हड़कंप, FIR से हत्या के प्रयास की धारा हटने की आशंका!

शामली :  नगर पालिका परिषद शामली के कार्यालय परिसर में 19 सितंबर को सभासद के साथ हुई कथित गंभीर घटना अब पुलिस जांच और साक्ष्यों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। सभासद अनिल कुमार उपाध्याय ने पुलिस अधीक्षक शामली को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावी विवेचना कराने के साथ-साथ CCTV/DVR, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की है। सभासद का आरोप है कि नगर पालिका परिषद के चेयरमैन अरविंद संगल के कार्यालय में घटना के दौरान उनके विरुद्ध भीड़ को उकसाने और हमला किए जाने की परिस्थिति कथित तौर पर बनाई गई, जिसके बाद उन्हें अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा और कोतवाली शामली पहुंचना पड़ा।

FIR में गंभीर धाराएं, अब जांच पर निगाहें

प्रार्थना पत्र के अनुसार घटना के संबंध में थाना शामली में FIR संख्या 0429/2026, दिनांक 19 सितंबर 2026 को शाम 7:05 बजे दर्ज की गई। इसमें BNS की धारा 3(5), 109(1), 126(2), 191(2), 115(2) एवं 356 का उल्लेख किया गया है।

सभासद ने विशेष रूप से धारा 109(1) को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह गंभीर प्रकृति की धारा है और प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव अथवा किसी अन्य कारण से विवेचना को प्रभावित कर इस धारा को हटाने या घटना की गंभीरता को कम करके प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

“साक्ष्य देखे बिना धारा कमजोर न की जाए”

प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि उपलब्ध CCTV फुटेज, DVR, मोबाइल वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और घटना की परिस्थितियों का समुचित परीक्षण कर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाए। सभासद ने आशंका जताई है कि यदि महत्वपूर्ण CCTV/DVR साक्ष्य समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए तो मामले की विवेचना प्रभावित हो सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या सुरक्षित रहेगा CCTV का सच?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 19 सितंबर की घटना के दौरान नगर पालिका कार्यालय परिसर में लगे CCTV कैमरों में क्या रिकॉर्ड हुआ? क्या फुटेज में कथित भीड़, विवाद और हमले की पूरी तस्वीर सामने आती है? और क्या पुलिस विवेचना में इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर निष्पक्ष तरीके से जांचा जाएगा?

सभासद ने एसपी से मांग की है कि CCTV/DVR साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराया जाए और FIR में दर्ज गंभीर धाराओं के संबंध में फैसला केवल उपलब्ध साक्ष्यों एवं विधिक परीक्षण के आधार पर ही लिया जाए।

नोट : उपरोक्त आरोप सभासद द्वारा एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

 

रिपोर्टर : अविनाश शर्मा 

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