किसी के माई के लाल में दम नहीं जो हमें रोक दे! धमकियों पर बरसे अविमुक्तेश्वरानंद
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रविवार को सनातन धर्म और गोरक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। भारत माता मंदिर के सामने आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने 'गोविष्टि यात्रा' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 81 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा देश में गोरक्षा और गोमाता के सम्मान को लेकर जनआंदोलन खड़ा करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने न केवल धार्मिक उपदेश दिए, बल्कि सत्ता, राजनीति और सामाजिक दोहरेपन पर तीखे प्रहार करते हुए सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया।
भाषण की शुरुआत करते हुए शंकराचार्य ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें डराने और धमकियां देने के प्रयास किए गए। उन्होंने सिंह गर्जना करते हुए कहा, "किसी के माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि हमें मरवा दे। अगर किसी पार्टी ने ऐसा करने की कोशिश की, तो वह सत्ता से बेदखल हो जाएगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जनता की वास्तविक भावनाओं को स्वर दे रहे हैं और सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।
शंकराचार्य ने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों की नियत पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व में साहस और इच्छाशक्ति होती, तो गाय को अब तक 'राज्यमाता' घोषित कर दिया गया होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें मुस्लिम और अन्य समुदायों के वोटों के ध्रुवीकरण के डर से गोरक्षा पर सख्त कदम नहीं उठा रही हैं। उन्होंने तंज कसा कि यदि अन्य देशों में धार्मिक भावनाओं का सम्मान होता है, तो भारत में गोमाता की पुकार क्यों नहीं सुनी जा रही? क्या यह देश वास्तव में हिंदू हितों के प्रति प्रतिबद्ध है?
शंकराचार्य ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि असली सत्ता जनता के पास है। उन्होंने अपील की कि लोग अपने मतदान की शक्ति को समझें। उन्होंने नारा दिया- "एक वोट, एक नोट।" उन्होंने आह्वान किया कि हर विधानसभा क्षेत्र में 'रामाधाम' बनाए जाएंगे और बूचड़खानों के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से निर्णायक युद्ध छेड़ा जाएगा।
आंदोलन की एकता पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, "यह मेरी अकेले की आवाज नहीं है, बल्कि चारों शंकराचार्यों का सामूहिक निर्णय है। मैं केवल प्रवक्ता के रूप में इस अभियान का नेतृत्व कर रहा हूँ।" उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है और वे केवल सनातन धर्म के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गोरखपुर से शुरू हुई यह यात्रा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। जहाँ एक तरफ शंकराचार्य ने गोरक्षा को धर्म से जोड़ा, वहीं दूसरी तरफ सरकार की नीतियों पर सवाल उठाकर इसे एक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि इस यात्रा का समाज और आने वाले चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


No Previous Comments found.