दुर्लभ पुण्य संयोग : मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी का पावन संगम

आज का दिन अपने आप में अद्भुत, दुर्लभ और अति पुण्यदायी है। बहुत कम अवसरों पर ऐसा संयोग बनता है जब मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी एक ही दिन पड़ें। शास्त्रों के अनुसार, ऐसे योग में किया गया भजन, स्मरण और संकल्प अनेक गुना फलदायी होता है।

भजन और साधना का सर्वोत्तम दिन

यह दिन हमें स्मरण कराता है कि बाहरी आडंबर से अधिक अंतरात्मा की साधना महत्वपूर्ण है। अतः आज के दिन—

  • अधिक से अधिक भगवान का नाम स्मरण करें
  • भजन, कीर्तन और जप करें
  •  क्योंकि ऐसी दुर्लभ तिथि जीवन में बार-बार नहीं आती।

 

एकादशी और मकर संक्रांति: धर्म का सुंदर संतुलन

आज एक ओर है षट्तिला एकादशी,
जहाँ—

  • अन्न ग्रहण वर्जित होता है
  • और अन्न दान नहीं किया जाता

दूसरी ओर है मकर संक्रांति,
जिसमें—

  • खिचड़ी का दान सर्वश्रेष्ठ और पुण्यकारी माना गया है

यही कारण है कि आज धर्म का मार्ग संयम और विवेक सिखाता है।

 

वैष्णव परंपरा में एकादशी सर्वोपरि

वैष्णवों के लिए एकादशी का महत्व सर्वोच्च है। इसलिए आज हमें षट्तिला एकादशी के नियमों का पूर्ण पालन करना चाहिए।

तो फिर खिचड़ी दान का क्या करें?

  • मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में खिचड़ी दान का संकल्प आज लें
  • लेकिन दान आज न करें
  • खिचड़ी का दान द्वादशी के दिन करें

 

आज क्या न करें?

आज एकादशी होने के कारण—

  • चावल
  • दाल
  • अन्न
  • खिचड़ी

इनका दान आज न करें, केवल संकल्प लें और उसे कल (द्वादशी) को विधिपूर्वक पूर्ण करें।

 

एकादशी पर दान करना हो तो क्या दान करें?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी पर यदि दान करना हो तो—

  • तिल
  • तिल से बने पदार्थ
  • एकादशी में प्रयुक्त वस्तुएँ

इनका दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

 

 

आज का दिन हमें सिखाता है कि श्रद्धा, नियम और संतुलन के साथ धर्म का पालन ही सच्ची भक्ति है।
आज—

  • भजन करें
  • नियमों का पालन करें
  • संकल्प लें
  •  और कल — संकल्प को दान के रूप में पूर्ण करें

ऐसी दुर्लभ तिथि जीवन को पवित्र और पुण्यमय बनाने का अनुपम अवसर है। 

हरि नाम स्मरण करते रहें। 

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