"सपा ने छीनी, भाजपा ने झटकी...बदायूं की शेखूपुर सीट पर कभी किसी एक दल का राज नहीं रहा!"

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की शेखूपुर विधानसभा सीट (संज्ञा 116) का सियासी अखाड़ा किसी रोमांचक दंगल से कम नहीं है, जहां पिछले तीन चुनावों के आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि यह सीट किसी एक पार्टी की बपौती बिल्कुल नहीं है और जनता हर पांच साल में बड़ा उलटफेर करने का पूरा माद्दा रखती है। साल 2008 के परिसीमन के बाद वजूद में आई इस नई नवेली सीट पर साल 2012 का पहला बड़ा विधानसभा मुकाबला हुआ, जिसमें समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरे आशीष यादव ने मैदान में ऐसा दम दिखाया कि विरोधियों के पसीने छूट गए और उन्होंने 68,533 वोट पाकर इस सीट पर जीत का परचम लहरा दिया। उस मुकाबले में कांग्रेस के भगवान सिंह शाक्य 60,281 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे और बसपा के मोहम्मद रिजवान 51,979 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर खिसक गए, जिससे आशीष यादव ने 8,252 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर शेखूपुर में सपा का खाता खोल दिया, जबकि उस चुनाव में करीब 62.70% जनता ने मतदान में हिस्सा लिया था।

समय का पहिया घूमा और साल 2017 आया तो हवा का रुख पूरी तरह बदल चुका था क्योंकि पूरे उत्तर प्रदेश में भगवा आंधी चल रही थी और इसका असर शेखूपुर में भी साफ देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी के धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य मैदान में उतरे और उन्होंने ऐसा जलवा बिखेरा कि सपा के हाथ से यह सीट फिसल गई। धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य ने धुआंधार प्रदर्शन करते हुए 93,702 वोट बटोरे और शानदार जीत दर्ज की, जबकि पिछले विधायक आशीष यादव (सपा) 70,316 वोट पाकर पिछड़ गए और दूसरे स्थान पर रहे, वहीं बसपा के मोहम्मद रिजवान एक बार फिर 64,327 वोट लेकर तीसरे स्थान पर संतोष करने को मजबूर हुए, जिससे भाजपा ने 23,386 वोटों के भारी अंतर से सपा से यह सीट झटक ली और उस समय मतदान प्रतिशत लगभग 62.46% दर्ज किया गया था।

लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ था क्योंकि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी और सपा की तरफ से चुनावी रण में उतरे हिमांशु यादव ने इतिहास रच दिया। मुकाबला इतना रोमांचक और सांसें थाम देने वाला था कि हर किसी की नजरें नतीजों पर टिकी थीं, जहां हिमांशु यादव ने रिकॉर्ड 1,05,531 वोट हासिल किए, तो वहीं भाजपा के मौजूदा विधायक धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य ने भी पूरी ताकत झोंकते हुए 99,431 वोट पाकर कड़ी टक्कर दी, लेकिन वे जीत की हैट्रिक बनाने से चूक गए और बसपा के मुस्लिम खान 34,932 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। हिमांशु यादव ने महज 6,100 वोटों के अंतर से भाजपा के हाथ से यह सीट छीनकर दोबारा सपा के पाले में डाल दी और इस बार वोटिंग का आंकड़ा 61.08% रहा।

अब सबकी निगाहें आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं कि आखिर ऊँट किस करवट बैठेगा और जनता इस बार किसे चुनेगी, क्योंकि पिछले तीन चुनावों के नतीजे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यहां कभी साइकिल दौड़ती है तो कभी कमल खिलता है। आगामी चुनाव के समीकरण समझने के लिए उन जमीनी मुद्दों की थाह लेनी होगी जो सीधे आम जनता की जेब और जिंदगी से जुड़े हैं, जैसे गांवों की टूटी-फूट सड़कें और जलभराव या जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था, किसानों के ट्यूबवेल की बिजली, सिंचाई के साधन और फसल के वाजिब दाम न मिलने का दर्द, युवाओं के लिए कस्बे और गांवों में रोजगार के नए अवसर या स्थानीय कारोबार के रास्ते कितने खुले हैं, सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधाएं और सरकारी स्कूलों का कायापलट वाकई जमीनी स्तर पर हुआ या नहीं, और विधायक निधि से हुए काम या जो काम आज भी फाइलों में दबे हैं उनका सच क्या है। कुल मिलाकर शेखूपुर का सियासी पारा कभी भी हाई हो सकता है और 2027 के रण में मुकाबला इस बार भी बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है।

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