कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा सूर्यमुखी की खेती पर दिया गया प्रशिक्षण

शिवहर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, शिवहर द्वारा आज हरपुर, ब्लॉक पिपराही शिवहर में एक महत्वपूर्ण कृषि कार्यक्रम का आयोजन किया।

 इस 'सामूहिक अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्ष्रण' में डॉ अनुराधा रंजन कुमारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ संचिता घोष वैज्ञानिक उद्यान, विशाल कुमार के नेतृत्व में सूर्यमुखी की खेती किसानों के आय बढ़ाने के लिए कराया जा रहा हैं, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025-26 के लिए जायद फसलों की उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन कराया जा रहा हैं।

 इस प्रत्यक्ष्रण के लिए सूरजमुखी (सनफ्लावर) को प्रमुख फसल के रूप में चुना गया, जिसमें उन्नत किस्म KBSH-90 का प्रदर्शन  कराया गया है।

प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अनुराधा रंजन कुमारी ने बताया है कि कृषि क्षेत्र में तिलहनी फसलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, और इसी क्रम में सूर्यमुखी एक लाभकारी एवं कम अवधि में तैयार होने वाली फसल के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिक तरीकों से सूर्यमुखी की खेती अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अनुराधा कुमारी रंजन ने बताया कि सूर्यमुखी की खेती के लिए 20–25 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। इसकी बुवाई रबी, खरीफ और जायद तीनों मौसमों में की जा सकती है, जिससे किसान वर्ष भर उत्पादन ले सकते हैं। उन्नत किस्मों और संकर बीजों का चयन करने से उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है।

वैज्ञानिक खेती के तहत संतुलित उर्वरक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। बुवाई के समय गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। समय-समय पर सिंचाई, विशेषकर फूल आने और दाना भरने के समय, फसल की उत्पादकता को बढ़ाती है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में निराई-गुड़ाई आवश्यक है, जबकि कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए अनुशंसित दवाओं का उपयोग करना चाहिए। मधुमक्खियों की उपस्थिति से परागण में सुधार होता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है।

फसल की कटाई उस समय करनी चाहिए जब फूल का पिछला भाग पीला-भूरा हो जाए। वैज्ञानिक प्रबंधन
वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, सही बीज उपचार करने और सूरजमुखी की उत्पादकता में वृद्धि के आधुनिक तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यह पहल किसानों को नवीनतम कृषि पद्धतियों से अवगत कराने पर केंद्रित थी।

यह कार्यक्रम शिवहर जिले में तिलहन (ऑयलसीड्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के विश्वविद्यालय के मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे स्थानीय स्तर पर कृषि विकास और नई तकनीक के प्रसार के लिए अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है।

रिपोर्टर : संजय गुप्ता 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.