सोना केवल संपत्ति नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विश्वास भी - सोनू बाबू
शिवहर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने को लेकर सोने की खरीदारी पर 1 साल के लिए रोक लगाने के मंतव्य पर सिमर शहर के राज दरबार से ताल्लुक रखने वाले राजलक्ष्मी ग्रुप सेवा संस्थान के निदेशक देवव्रत नन्दन सिंह और सोनू बाबू ने कहा है कि सोना केवल संपत्ति ही नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा विश्वास है।
सोनू बाबू ने कहा कि भारत में सोना केवल एक कीमती धातु नहीं ,बल्कि संस्कृति, परंपरा, सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में भारत लगातार प्रथम स्थान पर बना रहता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय समाज विशेषकर महिलाओं में सोने और चांदी के प्रति विशेष आकर्षण सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। विवाह ,त्योहार ,धार्मिक अनुष्ठान और पारिवारिक आयोजनों में सोने की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देती है।
सोनू बाबू ने बताया है कि अपने देश में धनतेरस, दिवाली ,अक्षय तृतीया और शादी विवाह जैसे अवसरों पर सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। ग्रामीण से शहरी समाज तक सोना सम्मान और समृद्धि का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक भारतीय समाज में महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकतर देर से मिला लेकिन स्त्री धन के रूप में शादी में मिला सोना पूरी तरह उनका अपना माना जाता है ।संकट के समय यही आभूषण परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनते रहे हैं ,यही वजह है कि भारतीय परिवार आज भी सोने को केवल गहना नहीं बल्कि सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं, जो महंगाई के असर को भी काफी हद तक संतुलित करता है ।भारतीय समाज में सोने के प्रति लगाव कम नहीं हुआ है, क्योंकि यह सोना केवल संपत्ति नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ाव विश्वास भी है।
रिपोर्टर : संजय गुप्ता

No Previous Comments found.