धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के लिए लाभकारी - प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अनुराधा रंजन
शिवहर : धान की सीधी बुवाई एक आधुनिक कृषि तकनीक है।इसमें नर्सरी तैयार करने और पौधों की रोपाई करने के बजाय सीधे खेत में बीज बोए जाते है। यह तकनीक कम पानी, कम श्रम और कम लागत में बंपर पैदावार देने के लिए किसानों के बेहद लाभकारी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान कृषि समन्वयक डॉक्टर अनुराधा रंजन कुमारी ने बताया है की किसानों के लिए धान की सीधी बुवाई के मुख्य लाभपानी की भारी बचत होती है।पारंपरिक रोपाई की तुलना में इसमें 15% से 20% कम पानी लगता हैं ।खेत में हमेशा पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती, जिससे भूजल का स्तर सुरक्षित रहता है।
उन्होंने बताया है कि लागत और मेहनत में कमी होती है।नर्सरी उखाड़ने और रोपाई करने का भारी खर्च बच जाता है, क्योंकि खेत की तैयारी सीधे बीज बोकर की जाती है। सीधी बुवाई वाले पौधे सीधे मिट्टी से पोषक तत्व लेते हैं, जिससे ये पारंपरिक रोपाई वाले पौधों समय से पहले पककर तैयार हो जाते है।
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सौरभ शंकर पटेल ने भी जानकारी दी है कि खेत में लगातार पानी न भरा रहने के कारण हानिकारक मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए फायदेमंद है। धान जल्दी कट जाने से किसानों को खेत खाली करने और अगली फसल (जैसे- गेहूँ) की समय पर बुवाई करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
सीधी बुवाई की प्रमुख विधियाँ ड्राई-डीएसआर है ।इसमें खेत को अच्छी तरह सूखाकर जुताई की जाती है और सीड ड्रिल मशीन या जीरो टिलेज मशीन के जरिए बीजों की बुवाई की जाती है।इसमें खेत में लेव (पडलिंग) लगाने के बाद, अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर मशीन की मदद से कतारों में बोया जाता है।
महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा है कि सीधी बुवाई के लिए मई के अंतिम सप्ताह से लेकर जून का पहला पखवाड़ा (लगभग 25 मई से 15 जून तक) सबसे उपयुक्त माना जाता हैं।
रिपोर्टर : संजय गुप्ता


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