खेत बचाओ अभियान सह- खरीफ अभियान के तहत किसानों को दी गई जानकारी
शिवहर : कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर एवं आत्मा, शिवहर के संयुक्त तत्वावधान में खेत बचाओ अभियान सह खरीफ अभियान का आयोजन पिपराही प्रखंड एवं तरियानी प्रखंड के विशम्भरपुर गांव में किया गया।
कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खरीफ मौसम में मौसम आधारित कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण एवं आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति जागरूक करना था।कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रखंड विकास पदाधिकारी पिपराही एवं प्रमुख पिपराही के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया । प्रखंड विकास पदाधिकारी पिपराही आदित्य कुमार ने किसानों को खरीफ अभियान के उद्देश्यों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। पिपराही प्रखंड प्रमुख ने किसानों को प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीजों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज से ही बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ शंकर पटेल ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। ऐसी स्थिति में किसानों को धान की सीधी बुवाई तथा कम अवधि वाली धान की किस्मों जैसे राजेन्द्र सरस्वती, राजेन्द्र श्वेता आदि को अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुवाई से 15–20 प्रतिशत तक सिंचाई जल की बचत होती है तथा मजदूरी लागत भी कम होती है। डॉ. पटेल ने किसानों को सलाह दी कि धान की नर्सरी लगाने या बिचड़ा रोपने से पूर्व बीजोपचार अवश्य करें।
साथ ही लेजर लैंड लेवलर द्वारा खेत समतलीकरण के लाभ बताते हुए कहा कि इससे सिंचाई जल की बचत, उर्वरकों का समान वितरण तथा फसल की समान वृद्धि सुनिश्चित होती है। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. एन. एम. एच. एनलिंग ने धान की खेती में अजोला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अजोला एक जैव उर्वरक है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर धान की फसल को उपलब्ध कराता है।
अजोला के उपयोग से रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है तथा मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। प्रखंड कृषि पदाधिकारी, पिपराही ने किसानों को विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वर्ण पूर्वी धान-2 किस्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को बिहार कृषि मोबाइल ऐप डाउनलोड कर मौसम, बाजार भाव, कृषि योजनाओं एवं तकनीकी सलाह से जुड़ी सूचनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने वैज्ञानिकों से खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, धान की किस्मों, उर्वरक प्रबंधन एवं जल संरक्षण संबंधी प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। किसानों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी नियमित आयोजन की मांग की।
रिपोर्टर : संजय गुप्ता
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