धागे के सहारे क्लाइमेट के सिस्टम पर चर्चा: तरियानी छपरा में जलवायु सापेक्ष खेती की चुनौतियों पर कार्यशाला का आयोजन
शिवहर : बागमती की माटी: युवा मंच की ओर से बागमती विद्यापीठ, तरियानी छपरा में एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का शीर्षक था: बागमती के बटाईदार: बाढ़, सुखाड़ और पलायन की ज़मीनी गवाही। इस कार्यशाला में कुल अठारह युवाओं ने सहभागिता की।
कार्यशाला के आरंभ में 'बागमती की माटी' के सह-संयोजक सतीश कुमार ने फेसिलिटेटरों और सभी सहभागियों का स्वागत किया और वर्कशॉप की रूपरेखा साझा की।
उसके बाद युवा मंच के मेंटॉर और जयकली कुंवर मेमोरियल ट्रस्ट (JKMT) के सह-संस्थापक राइडर राकेश ने बताया कि बागमती के इलाक़े में बंटाईदारी किस प्रकार जलवायु सापेक्ष खेती की राह में रुकावट है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक बागमती के क्षेत्र (विशेष शिवहर, सीतामढ़ी और मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले) में लगभग पचास प्रतिशत खेती बटाई पर होती है। खेती के तौर-तरीकों का निर्णय बटाईदार नहीं कर पाते बल्कि भूस्वामी करते हैं। ऐसी स्थिति में यह आवश्यक हो जाता है कि जलवायु संकट और बंटाईदारों की स्थिति को समझा जाये।
पहले सत्र के फेसिलिटेटर थे ग्राम चेतना आंदोलन के सहसंस्थापक और जलवायु कार्यकर्ता आलोक चन्द्र प्रकाश। उन्होंने एक धागे की मदद से जलवायु तंत्र को बड़े ही रोचक अंदाज़ में समझाया। मि्टी, पानी, हवा, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीट-पतंग कैसे एक-दूसरे से कनेक्टेड और एक-दूसरे पर निर्भर हैं, खुद-ब-खुद साफ़ हो गया। उन्होंने अपने सत्र में संगठन-निर्माण के आवश्यक पहलुओं पर भी बातचीत की।
अगले सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोधार्थी नीरज भारत ने जमीनी काम में शोध की उपयोगिता के बारे में बताया तथा शोध पद्धति समझाया। उन्होंने अपने सत्र की शुरुआत एक मज़ेदार खेल से की। अपने सत्र के अंतिम हिस्से में बाढ़, सुखाड़ और पलायन की रौशनी में उन्होंने बागमती के बंटाईदारों पर आधारित एक शोध-प्रश्नावली पर बातचीत की अगुवाई भी की।
कार्यशाला में समाज सेवी शालिनी कुमारी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सदस्यों को किसानों से संवाद स्थापित करने परेशानी आ सकती है वैसे में टीम के वरिष्ठ साथियों की सहायता करनी चाहिए।
कार्यशाला के अंत में बागमती विद्यापीठ की चीफ़ मेंटॉर प्रीति कुमारी ने आलोक चन्द्र प्रकाश और नीरज भारत समेत
समेत सभी सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि उनके लिए यह खुशी की बात है बागमती विद्यापीठ को इस महत्त्वपूर्ण कार्यशाला का सह आयोजक बनने का अवसर मिला।
रिपोर्टर : संजय गुप्ता
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