बिहार पुलिस द्वारा मानव व्यापार और बाल श्रम की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान

शिवहर : "नया सवेरा 3.0" के तहत शिवहर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र कुमार के कुशल निर्देशन में यह कार्यक्रम शिवहर पुलिस और 'सवेरा स्वयंसेवी संगठन' के संयुक्त तत्वावधान में उत्क्रमित उच्च विद्यालय सुंदरपुर खरौना परिसर में आयोजित की गई l 

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक धनंजय कुमार झा के द्वारा किया गया l 

सचिव मोहन कुमार बताया गया कि बच्चों का असली स्थान स्कूलों में है, दुकानों या ईंट-भट्ठों पर नहीं। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराना उनके मौलिक और शैक्षणिक अधिकारों का हनन है।

मानव तस्कर अक्सर गरीब और भोले-भाले परिवारों को बेहतर भविष्य, नौकरी या मुफ्त शिक्षा का झांसा देकर बच्चों का शोषण करते हैं। समाज के हर नागरिक को ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि केवल दुकानों या कारखानों में ही नहीं, बल्कि घरों में भी छोटे बच्चों को बाल नौकर/नौकरानी के रूप में रखना गैर-कानूनी और सामाजिक कुरीति है।

बाल श्रम और मानव तस्करी को केवल पुलिस या प्रशासन अकेले समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने आम लोगों, दुकानदारों और अभिभावकों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम या संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन (1098 ) पर सूचित करें।

"जब तक समाज का हर वर्ग बाल श्रम के खिलाफ एकजुट नहीं होगा, तब तक बच्चों को उनका सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य नहीं मिल सकता।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र कुमार लैंगिक विशेषज्ञ ने 'वन स्टॉप सेंटर' (OSC) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और महिलाओं के अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है वन स्टॉप सेंटर का मूल उद्देश्य है कि हिंसा से पीड़ित किसी भी महिला (चाहे वह घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी या दहेज प्रताड़ना की शिकार हो) को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए 'वन स्टॉप सेंटर' की स्थापना की गई है।

इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

रिपोर्टर : संजय गुप्ता

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.