नई पीढ़ी के इस आंदोलन की भाषा में आवेग था,आक्रोश था,कल्पना शक्ति की पराकाष्ठा थी-राजद नेता नवनीत कुमार झा

शिवहर : पूर्व विधानसभा प्रत्याशी व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने कहा है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली जंतर-मंतर की आंच ,पटना से लेकर पूरे देश में फैली उससे देश के विभिन्न पार्टियों के नेताओं , शासन प्रशासन को सबक लेने की जरूरत है। नई पीढ़ी के इस आंदोलन की भाषा में आवेग था ,आक्रोश था, कल्पना शक्ति की पराकाष्ठा थी।

वरिष्ठ राजद नेता नवनीत ने बताया कि देश ने इस आंदोलन में कई ऐसे दृश्य देखे जो और कल्पनीय थे ,एक पिटता हुआ बच्चा बार-बार पुलिस वालों से कह रहा था और मारो। यह आंदोलन जेन -जी का था। जिसकी गूंज सालों तक सुनाई देगी। परीक्षाओं के उल्लंघन से उकताई नौजवान पीढ़ी ने वह सब कर दिया जिसकी कुछ दिनों पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने बताया कि राजनीतिक पंडित अपना सिर धुन रहे हैं और पारंपरिक समाज शास्त्रियों को समझ में नहीं आ रहा है कि इस आंदोलन को  पारिभाषिक शब्दवालिया कैसे गढ़े। इस आंदोलन में मुद्दे आगे निकल गए और नेता पीछे रह गए। छात्र-छात्राओं ने इस आंदोलन को लोकतंत्र का उत्सव बना दिया। 

शिवहर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी नवनीत कुमार झा ने बताया कि गांधी हमारी चेतना में अभी भी कहीं ना कहीं जिंदा है ।बच्चे पुलिस वालों की टोपियां खींचकर भाग रहे थे और खिलखिला रहे थे, वॉटर कैनन से बरसते पानी में भीग रहे थे और नाच रहे थे , पुलिस की लाठियां खाकर अपने हक के लिए डटे हुए थे।समझ नहीं आ रहा था कि वह पिकनिक मनाने आए हैं या किसी आंदोलन में भाग लेने। राजद नेता नवनीत कुमार झा ने बताया कि आंदोलन अभूतपूर्व इसलिए भी था कि इसमें नेतृत्व की भूमिका नगण्य रही,जिसमें देशभर के नौजवान खुद व खुद चले आ रहे थे।

उन्होंने कहा है कि यह आंदोलन इतिहास में अमर हो गया है । जिस तरह इन आंदोलनकारी ने मुख्य विपक्षी दलों को संसद से निकाल कर सड़क पर आने को मजबूर कर दिया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा तक मैदान न छोड़ने की ऐलान किया था। सबसे अहम बात आंदोलन के खत्म होने के बाद एक और नई बात हुई ,भारत में किसी जुलूस के विसर्जन के बाद उसमें भाग लेने वाले मैदान में फेके गए कुडे़ कचड़े की सफाई करें ऐसा आमतौर से दिखता नहीं है पर इस आंदोलन में दिखा।

युवा नेता नवनीत ने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी हो गया आंदोलनकारी अपने-अपने घर को लौट गए हैं इस परिस्थिति में एक परिस्थिति बनकर उभरी है कि अब पूरे देश को बैठकर कुछ बुनियादी मुद्दों पर सिर जोड़कर विचार करना होगा हालांकि सरकार ने नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स जरूर बना दी है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि परीक्षा व्यवस्था में आमूल- चूल परिवर्तन के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना होगा ।रोजगार विभिन्न विकास मॉडल के साथ हम दुनिया की सिर्फ पांच अर्थव्यवस्था में पहुंच भी जाए तब भी असंतोष बना रहेगा। इसलिए सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कमर कसनी ही होगी।

रिपोर्टर : संजय गुप्ता

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