डेंगू में स्वउपचार से बचने की दी प्रभारी सिविल सर्जन डॉ आरके सिंह ने सलाह

शिवहर : गर्मी के मौसम के बाद बारिश जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दिलाती है। वहीं डेंगू की आहट भी लेकर आती है। आपके घरों की छतों पर या आस पास फेंके हुए टूटे-फूटे बर्तनों, टायरों, गमलों आदि में बरसात का जमा साफ पानी डेंगू के पनपने की मूल वजह हो सकती है। ये बातें जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सुरेश राम ने कही। 

उन्होंने कहा कि यह बीमारी डेंगू फैलाने वाले मच्छर एडीज के पनपने के कारण होता है। ये मच्छर साफ पानी मे आपके घरों के आस पास पनपते हैं और ज्यादातर दिन में ही काटते हैं और आपको डेंगू की चपेट में डाल देते हैं। आप जागरूक रहे और डेंगू से बचें। अगर हम कुछ सावधानियों को याद रखें तो डेंगू एवं चिकनगुनिया से बच सकते हैं।

डॉ राम ने बताया कि डेंगू की जांच व इलाज की व्यवस्था सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध है। वहां पेरासिटामोल की भी उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है।

सिविल सर्जन डॉ आर के सिंह ने बताया कि डेंगू पीड़ित मरीजों के लिए सदर अस्पताल में डेंगू वार्ड निर्मित है जहाँ मरीजों का ईलाज किया जाएगा। जिले में एन एस 1 एलिसा किट पर्याप्त मात्रा में डेंगू जांच हेतु उपलब्ध है। प्रखंड स्तर पर भी प्रचार प्रसार कराया जा रहा है। डेंगू मरीज़ प्रतिवेदित होने पर उनके घर के आस पास (शहरी क्षेत्र में नगर परिषद एवं ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा) फॉगिंग कराया जाएगा।
इसके लिए पर्याप्त मात्रा में मालाथियन दवा एवं फॉगिंग मशीन उपलब्ध है।

प्रभारी भीबीडीसी कामेश्वर प्रसाद एवं कृष्ण शेखर द्वारा बताया गया कि आईएचआईपी पोर्टल पर रियल टाइम रिपोर्टिंग एवं मॉनिटरिंग की जा रही है। इस वर्ष अभी तक एक भी डेंगू का मरीज प्रतिवेदित नहीं है।

डॉ राम ने बताया कि डेंगू व चिकनगुनिया के लक्षणो में बदन, सर, आंखों के पीछे एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर लाल धब्बे का निशान, नाक मसूढ़ों या उल्टी के साथ रक्त स्राव है। इसके अलावा काला मल भी डेंगू व चिकनगुनिया की तरफ इशारा करता है।

उन्होंने बताया कि अपने घरों के आसपास पानी जमा ना होने दें। घरों की छतों पर टूटे-फूटे या खुले ढक्कन वाले बर्तन न रखे॔। पानी के टैंक के ढक्कन बंद रखें। कूलर, फ्रिज के पानी रोज बदलें, दिन मे भी मच्छरदानी का प्रयोग करें। यदि सर्दी बुखार और बदन मे दर्द, हड्डी और जोड़ मे दर्द, उल्टी आदि हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल मे जाकर चिकित्सकीय परामर्श लें।
स्वउपचार से बचें। बुखार के लिए केवल पेरासिटामोल ही लें। एस्प्रीन या ब्रुफेन ग्रुप की दवाई भूल से भी न लें।

रिपोर्टर : संजय गुप्ता 

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