शिल्पी कुशवाहा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले अखिलेश, 5 लाख का चेक और CBI जांच की मांग

उत्तर प्रदेश की सियासत में आज हरदोई का गढ़ी रसूलपुर गांव केंद्र बिंदु बन गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज मल्लावां पहुंचे, जहां उन्होंने रोंगटे खड़े कर देने वाले शिल्पी कुशवाहा हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। अखिलेश यादव ने न केवल परिवार को ढांढस बंधाया, बल्कि 5 लाख रुपये का चेक सौंपते हुए योगी सरकार की बुलडोजर नीति और कानून-व्यवस्था को लेकर ऐसे सवाल दागे कि लखनऊ तक हड़कंप मच गया। भारी सुरक्षा बल के बीच पहुंचे अखिलेश ने साफ कहा कि इस सरकार में न्याय का पैमाना जाति और वर्चस्व देखकर तय होता है।

शिल्पी कुशवाहा के घर पहुँचते ही माहौल गमगीन हो गया। अखिलेश यादव ने मृतक शिल्पी के माता-पिता और भाई से बात की, जिनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवार की व्यथा सुनने के बाद अखिलेश ने मीडिया से मुखातिब होकर तीखे वार किए। अखिलेश ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कारण बेटी की जान गई। परिवार को स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए इस पूरे मामले की CBI जांच होनी चाहिए।

इतना ही नहीं बुलडोजर पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि कन्नौज में तो 10 मिनट में गैंगस्टर लग जाता है और घर गिरा दिए जाते हैं, तो हरदोई में सरकार का बुलडोजर क्यों सो रहा है? अखिलेश ने पूछा कि आखिर सरकार यहां लंगड़ा ऑपरेशन और बुलडोजर कार्रवाई से पीछे क्यों हट रही है? उन्होंने फतेहपुर, प्रतापगढ़ और गाजीपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वर्चस्ववादी लोग बेटियों की जान ले रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

दरअसल, 13 अप्रैल की शाम, 26 वर्षीय शिल्पी कुशवाहा अपने घर से कूड़ा डालने निकली थी। इसी दौरान गांव के ही दबंग ऋषभ द्विवेदी ने उस पर फावड़े से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। परिवार का आरोप है कि शिल्पी खुद पुलिस के पास गुहार लगाने गई थी, लेकिन थानेदार और सीओ ने उसकी एक न सुनी। मामले में ऋषभ और उसके पिता प्रमोद द्विवेदी जेल में हैं। आरोपी ने अफेयर का दावा किया था, लेकिन परिवार इसे वर्चस्व और गुंडागर्दी का मामला बता रहा है। मां ने कहा "हमें सिर्फ फांसी चाहिए! उनके मकान पर बुलडोजर चले और उनकी जमीन नीलाम हो, तभी मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। वहीं मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला। उन्होंने विकास और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा। अखिलेश ने कहा कि हमने 2016 में ही आगरा एक्सप्रेस-वे पर सुखोई और मिराज जैसे प्लेन उतरवा दिए थे, भाजपा आज जो कर रही है वो हमारी नकल है। उन्होंने दावा किया कि आगरा एक्सप्रेस-वे आज भी गंगा एक्सप्रेस-वे से कहीं बेहतर है। महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए उन्होंने भाजपा को महिला विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा खुद नहीं चाहती कि ये बिल पास हो, ये सिर्फ दिखावा है। अखिलेश ने याद दिलाया कि उन्होंने महिलाओं की मदद के लिए 1090 हेल्पलाइन बनाई थी, जिसे इस सरकार ने निष्प्रभावी कर दिया है।

आपको बता दें अखिलेश यादव का यह दौरा आसान नहीं था। इससे पहले 23 अप्रैल को सपा के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने संडीला के पास ही रोक दिया था और कई कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट किया गया था। जनता के भारी आक्रोश और सपा के दबाव के बाद ही 28 अप्रैल को मल्लावां कोतवाल शिवाकांत पांडेय को सस्पेंड किया गया। वहीं आज भी अखिलेश के पहुँचने से पहले पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। अखिलेश यादव ने हरदोई की धरती से यह साफ संदेश दे दिया है कि समाजवादी पार्टी अब सड़क से लेकर सदन तक 'बेटी बचाओ' के नारे की असलियत उजागर करेगी। परिवार की फांसी और बुलडोजर की मांग ने सरकार को धर्मसंकट में डाल दिया है। ऐसे में सवाल है कि क्या योगी सरकार इस मामले में भी वही कठोर न्याय दिखाएगी जो वह अन्य मामलों में दिखाती है? या फिर अखिलेश की CBI जांच की मांग राजनीति की भेंट चढ़ जाएगी? फिलहाल हरदोई का यह कांड अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले चुका है। 

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