सफल शिमला मिर्च खेती के लिए जरूरी सुझाव और तकनीक
शिमला मिर्च (Capsicum annuum) एक महत्वपूर्ण सब्ज़ी है, जिसे भारत के विभिन्न हिस्सों में उगाया जाता है। यह पोषण से भरपूर और व्यापारिक दृष्टि से लाभदायक फसल है। शिमला मिर्च की खेती के लिए सही विधि अपनाना जरूरी है, ताकि अच्छी उपज और लाभ मिल सके।
1. भूमि और जलवायु
शिमला मिर्च के लिए हल्की दोमट या रेत-मिट्टी वाली जमीन उपयुक्त है।
जमीन की pH 6.0-7.5 होनी चाहिए।
यह फसल ठंडा या समशीतोष्ण जलवायु पसंद करती है, तापमान 20°C-30°C सबसे अनुकूल है।
अत्यधिक गर्मी या ठंड शिमला मिर्च की पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
2. बीज और रोपण
बीज चयन: उच्च गुणवत्ता वाले बीज लें, जो रोग प्रतिरोधी और उच्च उपज देने वाले हों।
बीज बुवाई: बीज को नर्सरी में ट्रे या छोटे गमलों में बोया जाता है।
बीज अंकुरण: बीज अंकुरित होने में 7-15 दिन लगते हैं।
रोपण समय: नर्सरी से पौधों को 25-30 दिन के होने पर खेत में रोपित करें।
रोपाई दूरी: 45-60 सेमी × 45-60 सेमी की दूरी उपयुक्त होती है।
3. खाद और उर्वरक
जैविक खाद: खेत में गोबर खाद या कंपोस्ट मिलाएँ।
रासायनिक उर्वरक:
नाइट्रोजन (N): 120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फॉस्फोरस (P₂O₅): 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
पोटाश (K₂O): 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
खेत की मिट्टी के अनुसार उर्वरक की मात्रा समायोजित करें।
4. सिंचाई
शिमला मिर्च को नियमित और संतुलित जल चाहिए।
सप्ताह में 2-3 बार पानी देना आदर्श है।
पानी की अधिकता से जड़ सड़न और रोग हो सकते हैं।
5. छंटाई और समर्थन
पौधों को मजबूत बनाने के लिए ऊपर की टहनी की छंटाई करें।
बड़े पौधों को लकड़ी या बांस की सहारा दें, ताकि फल जमीन पर न गिरें।
6. रोग और कीट प्रबंधन
आम रोग: जड़ सड़न, पत्ती पीला पड़ना, मोज़ेक वायरस।
कीट: aphids, thrips, और fruit borer।
रासायनिक या जैविक कीट नाशक का समय पर छिड़काव करें।
7. कटाई और उपज
शिमला मिर्च 60-90 दिन में पककर तैयार हो जाती है।
फल का रंग बदलने पर कटाई करें।
कटाई समय पर करने से उपज और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती है।
8. विपणन और लाभ
शिमला मिर्च की स्थानीय मंडियों और थोक बाजारों में अच्छी मांग है।
सुपरमार्केट और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में भी निर्यात किया जा सकता है।
उचित देखभाल और सही समय पर कटाई से हेक्टेयर पर 20-25 टन उपज प्राप्त की जा सकती है।
शिमला मिर्च की खेती सही भूमि, उचित जलवायु, संतुलित खाद, नियमित सिंचाई और रोग नियंत्रण पर निर्भर करती है। यदि किसान इन सभी कदमों का पालन करें, तो यह लाभदायक और स्थायी फसल साबित हो सकती है।
No Previous Comments found.