सरकार महिलाओं के हक के आड़ में संविधान के मूल ढांचे को बदलना चाहती है-पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नवनीत कुमार झा
शिवहर - पूर्व विधानसभा प्रत्याशी , राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता व सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने महिला आरक्षण संविधान संशोधन व परिसीमन विधयक पर लोकसभा में गिर जाने पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है की सरकार महिलाओं के हक के आड़ में संविधान के मूल ढांचे को बदलना चाहती है।
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने बताया है कि कल 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण (131वां) संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर कहा कि यह बिल महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक स्ट्रक्चर बदलने का प्रयास था। श्री झा ने इस बिल को "संविधान पर हमला" बताते हुए कहा कि इसे रोक देना ही देश हित में ठीक था।
युवा नेता नवनीत झा ने कहा, "'भारत ने देख लिया, INDIA ने रोक दिया'। यह महिला आरक्षण नहीं, बल्कि असंवैधानिक तरकीब थी"।
उन्होंने विरोध करते हुए कहा कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है, जिससे 2029 से पहले यह लागू नहीं होगा।
श्री झा ने बताया है कि हमारे इंडिया घटक दल के कांग्रेस के राहुल गांधी ने सरकार से बिना किसी शर्त (परिसीमन) के तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है।
गौरतलब हो कि लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131 वां) संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन सहित तीनों विधेयक दो दिनों तक चली लंबी चर्चा के बाद मत विभाजन में मोदी सरकार की ओर से प्रस्तुत विधायक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) के बिना गिर गया।
रिपोर्टर : संजय गुप्ता


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