आज भी रेडियो की प्रासंगिकता बरकरार, कपड़ा व्यवसायी ओमप्रकाश गुप्ता

शिवहर : डिजिटल युग में भी रेडियो का महत्व कम नहीं हुआ है। यह सबसे सस्ता, सुलभ और पोर्टेबल माध्यम है जो बिना इंटरनेट के भी प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में महत्वपूर्ण व सटीक जानकारी सीधे जन-जन तक पहुँचाता है।1975 से रेडियो के शौकीन शिवहर शहर के राजस्थान चौक पर स्थित नारायण साह कपड़ा दुकान के मालिक व पूर्व में रह चुके दैनिक जागरण  एवं नवभारत टाइम्स के प्रेस रिपोर्टर ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया है कि आज के समय में रेडियो की प्रासंगिकता और महत्व को समझा जा सकता है।

 कपड़ा व्यवसायी ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया है कि इसके लिए महंगे स्मार्टफोन या इंटरनेट डेटा पैक की आवश्यकता नहीं होती। एक साधारण और सस्ते रिसीवर की मदद से कोई भी व्यक्ति समाचार और मनोरंजन सुन सकता है।रेडियो पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों, जैसे—समाचार, क्षेत्रीय लोकगीत, कृषि संबंधी जानकारी, शिक्षा सामग्री, और संगीत का प्रसारण किया जाता है। भारत में रेडियो प्रसारण मुख्य रूप से आकाशवाणी और विभिन्न एफएम (FM) चैनलों के माध्यम से तरंगों के जरिए किया जाता है।

श्री गुप्ता ने बताया है कि बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय जब इंटरनेट और मोबाइल टावर फेल हो जाते हैं, तब रेडियो ही लोगों की जान बचाता है और सटीक जानकारी देता है। भारत जैसे विशाल देश में आज भी गाँव-गाँव तक कृषि, मौसम, और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी जानकारी ऑल इंडिया रेडियो (AIR) और कम्युनिटी रेडियो के जरिए सबसे पहले पहुँचती है। यात्रा करते समय, गाड़ी चलाते हुए या घर के काम करते हुए इसे आसानी से सुना जा सकता हैं ।यह स्क्रीन टाइम को कम करने में भी मदद करता है। रेडियो पर हर भाषा और क्षेत्र का संगीत, नाटक और स्वास्थ्य/शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, जो ज्ञान और मनोरंजन दोनों प्रदान करते है।

उन्होंने बताया कि रेडियो का इतिहास उन्नीसवीं सदी के अंत में शुरू हुआ, जब वैज्ञानिकों ने अदृश्य विद्युत चुम्बकीय तरंगों  का पता लगाया। इसे एकतरफा संचार और मनोरंजन का सबसे पहला और सशक्त साधन माना जाता है।

पुराने रेडियो खराब होने पर  नया रेडियो खरीद कर समय-समय पर रेडियो से खबर एवं प्रसारण किए जाने वाले कार्यक्रम सुनते रहते हैं। वे बताते है कि रात में 11 बजे रेडियो से प्रसारण होने वाले खबर को सुनकर ही सोते हैं, सुबह उठते ही रेडियो को चालू कर भक्ति गाना सुनते रहते हैं और सुबह का समाचार भी सुनते हैं।

उन्होंने कहा कि 1980 और 1990 के दशक में All India Radio मनोरंजन और सूचना का मुख्य साधन था। इस दौरान भारतीय बाजार में फिलिप्स, नेशनल पैनासोनिक, मर्फी, संतोष,सोनी और सोनियो जैसी दिग्गज कंपनियों के ट्रांजिस्टर और रेडियो उपलब्ध थे।

रिपोर्टर : संजय गुप्ता
 

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