लघु कथा : सर्दियों की धूप

सर्दियों की सुबह दीपक जल्दी उठकर अपने घर की छत पर गया। चारों ओर ठंडी हवा थी, पर सूरज की हल्की धूप धीरे-धीरे मैदान पर फैल रही थी। दीपक ने धूप में बैठकर गर्म होने का आनंद लिया।

उसके पड़ोसी रमेश, जो अक्सर आलसी और समय पर काम न करने वाला था, आया और बोला, "इतनी धूप में क्या बैठा है? अंदर जाकर आराम कर लो।"

दीपक मुस्कुराया और बोला, "रमेश, सूरज की यह धूप न केवल शरीर को गर्म करती है, बल्कि मन को भी उजाला देती है। मैं इसे लेकर अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य दोनों बढ़ा रहा हूँ।"

रमेश ने सोचा, "अच्छा, मैं भी कोशिश करता हूँ।" अगले दिन से रमेश भी सुबह की हल्की धूप में समय बिताने लगा। धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि उसकी तबियत बेहतर हो रही है और मन भी हल्का हो गया।

सीख :

सर्दियों की हल्की धूप में समय बिताना केवल शरीर को गर्म नहीं करता, बल्कि स्वास्थ्य और मन को भी प्रकाश और ऊर्जा देता है। छोटे-छोटे अच्छे आचरण से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।

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