लघु कथा : सफलता की अदृश्य शुरुआत
एक पुराने गाँव के किनारे एक पेड़ खड़ा था। वह पेड़ बहुत कुछ देखता था—लोगों की खुशियाँ, दुख, मेहनत और आलस। उसी पेड़ के पास एक लड़का आता था, जिसका नाम था मोहन।
मोहन रोज़ उस पेड़ के नीचे बैठता और दूसरों को काम करते हुए देखता। किसान खेतों में पसीना बहाते, बच्चे स्कूल जाते, लेकिन मोहन बस सपने देखता—“काश मैं बिना मेहनत के अमीर बन जाऊँ।”
पेड़ यह सब चुपचाप देखता रहता। एक दिन पेड़ ने सोचा, “काश मैं बोल पाता, तो इसे समझाता कि जड़ें जितनी गहरी होती हैं, पेड़ उतना ही ऊँचा होता है।”
कुछ समय बाद आँधी आई। तेज़ हवाओं ने कई पेड़ों को गिरा दिया। लेकिन वही पेड़ मज़बूती से खड़ा रहा, क्योंकि उसकी जड़ें गहरी थीं। मोहन यह सब देख रहा था।
उस दिन पहली बार मोहन ने पेड़ को अलग नज़र से देखा। उसे समझ आया कि जो ऊपर से मज़बूत दिखता है, उसकी असली ताकत नीचे छिपी मेहनत में होती है।
अगले दिन से मोहन ने मेहनत शुरू की। धीरे-धीरे उसने अपने जीवन की “जड़ें” मजबूत कर लीं, और समय के साथ वह भी सफल हो गया।
पेड़ अब भी खड़ा था—मुस्कुराता हुआ, क्योंकि बिना बोले ही उसने एक ज़िंदगी बदल दी थी।
सीख :
असली ताकत और सफलता उन मेहनती जड़ों में होती है, जो दिखाई नहीं देतीं।
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