1 जुलाई से स्कूलों में लौटी रौनक : ज्ञान, अनुशासन व सपनों की नई शुरुआत

शादुलशहर : ग्रीष्मकालीन की लम्बी छुट्टियों के बाद आज 1 जुलाई को विद्यालयों के केवल दरवाजे ही नहीं खुले, खुली आशाओं की नई खिड़की, सपनों की नई उड़ान व भविष्य की नई दिशा। छोटे-छोटे बच्चों की चहल-पहल, मासूम मुस्कान व नए उत्साह के साथ विद्यालय परिसर फिर से जीवंत हो उठा। 

सुबह की ठंडी हवा में गूंजती प्रार्थना, यूनिफॉर्म में सजे बच्चे, पीठ पर बस्ते व आंखों में चमक, यह सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि एक युग की शुरुआत है। शिक्षक-शिक्षिकाएं नई ऊर्जा के साथ कक्षाओं में उपस्थित हैं, बच्चों को केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन व जीवन का मार्ग दिखाने को तैयार हैं। कुछ बच्चों ने नई कक्षाओं में प्रवेश किया, कुछ ने नए मित्र बनाए, तो कुछ ने पुराने दोस्तों से मिलकर छुट्टियों की यादें साझा की। शिक्षक भी पूरे उत्साह व नई ऊर्जा के साथ विद्यार्थियों के स्वागत में जुटे रहे। विद्यालय परिसर में फिर से खिली मुस्कानों ने यह जता दिया कि स्कूल केवल किताबों तक सीमित नहीं, यह तो वह स्थान है, जहां आत्मा को आकार मिलता है, विचारों को दिशा मिलती है व नन्हे कदम बड़े सपनों की ओर बढ़ते हैं। छात्रों ने फिर से कलम उठाई है, न सिर्फ उत्तर लिखने के लिए, बल्कि अपना भाग्य भी लिखने के लिए। विद्यालय खुलते ही पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों व अन्य सह-पाठ्यक्रमिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। यह भी सच है कि विद्यालय खुलने से केवल शिक्षा नहीं लौटती, एक नई ऊर्जा, एक नई उमंग व भविष्य निर्माण की दिशा भी लौटती है। 1 जुलाई केवल तिथि नहीं, यह जीवन का नया अध्याय को रचित करने का सुअवसर है। सभी बच्चों व शिक्षकों को ढेरों शुभकामनाएं। 

रिपोर्टर : नरेश गर्ग

 

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