श्रीगंगानगर का 'गोल्डन फ्रूट' किन्नू: जिसकी मिठास की दीवानी है पूरी दुनिया
श्रीगंगानगर : राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला इस बार किन्नू उत्पादन में नया इतिहास लिखने की ओर बढ़ रहा है। उत्तर भारत में अपनी विशेष पहचान बना चुके गंगानगरी किन्नू की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ी है। जिला उद्यान विभाग ने इस सीजन में करीब 3.10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान जताया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। किसानों के चेहरों पर उत्साह साफ झलक रहा है और व्यापारी भी बाजार में बढ़ती हरकतों को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के बागानों में इस समय किन्नू की सुनहरी परतें दूर से ही चमक बिखेर रही हैं। जिले में 16000 हेक्टेयर क्षेत्र किन्नू उत्पादन के अंतर्गत आता है। दिसंबर की ठंड और रात के तापमान में गिरावट ने फल में मिठास और रस बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे तापमान और नीचे जाएगा, किन्नू का स्वाद और निखरेगा।
इसी रुझान को देखते हुए किसानों ने जनवरी महीने की सप्लाई के लिए 30 से 35 रुपये प्रति किलो तक के सौदे पहले ही कर लिए हैं। किसान संतोष कुमार बताते हैं कि इस बार फसल का फल आकार, रंग और रस, तीनों ही स्तर पर बेहतर है। वही उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत उछाल दर्ज हुआ है, जिससे बाजार में कीमतें मजबूत रहने की उम्मीद है।
श्रीगंगानगर के रीको क्षेत्र में स्थापित करीब दो दर्जन वैक्सीन और ग्रेडिंग प्लांट इस उद्योग को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इन संयंत्रों के माध्यम से किन्नू को आकर्षक चमक, बेहतर पैकिंग और सुरक्षित परिवहन की सुविधा मिलती है। यहीं से तैयार किन्नू पहले बांग्लादेश, जाता था बांग्लादेश के लिए स्पेशल ट्रेन चालू की गई थी और अब गंगानगर का किन्नू नेपाल और भूटान जैसे देशों में निर्यात भी किया जाता है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में जूस प्रोसेसिंग व पैकिंग यूनिट्स की संख्या बढ़े, तो किसानों को और अधिक लाभ मिल सकता है।
उद्यान विभाग की उप-निदेशक प्रीति गर्ग का कहना है कि है कि गंगानगर की दोमट मिट्टी, नियंत्रित सिंचाई और अनुकूल जलवायु किन्नू की गुणवत्ता को विशिष्ट बनाती है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में फल झड़ने की समस्या फ्रूट क्लाई और फ्रूट होपर जैसी बीमारियों के कारण बनी हुई है, लेकिन पौष्टिक तत्व प्रबंधन और समय पर कीट नियंत्रण से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इस बार उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही स्तर पर जिले का प्रदर्शन शानदार रहने वाला है। बढ़ती सर्दी के साथ किन्नू की मिठास और बाजार मांग दोनों नई ऊँचाइयों पर पहुंचेंगे।
रिपोर्टर : नरेश गर्ग

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