शुक्र प्रदोष व्रत कथा – भगवान शिव की भक्ति से बदला जीवन
प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह सच्चा भक्त था, लेकिन गरीबी और जीवन की परेशानियों ने उसका मन उदास कर दिया था। वह हर दिन भगवान शिव की पूजा करता, पर फिर भी जीवन में सुख नहीं था।
एक दिन उसे एक साधु मिले। साधु ने कहा, “शुक्रवार के प्रदोष व्रत का पालन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत जीवन की सभी बाधाओं और दुखों को दूर करता है।” ब्राह्मण ने साधु की बात मानी और अगले शुक्रवार के प्रदोष व्रत का संकल्प लिया।
उसने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सुबह से व्रत रखा, दिनभर सात्त्विक भोजन ग्रहण किया और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। उसने जल, दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक किया, बेलपत्र अर्पित किए और “ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जप किया। उसकी पत्नी भी पूरे मन से पूजा में शामिल हुई।
कुछ समय बाद, भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए। एक रात ब्राह्मण को स्वप्न में शिव जी के दर्शन हुए। भगवान शिव ने कहा, “तेरी भक्ति सच्ची है, तेरे कष्ट जल्द समाप्त होंगे।” उसके जीवन में धीरे-धीरे सुख और समृद्धि आई। परिवार में शांति और खुशियाँ लौट आईं, और आर्थिक परेशानियाँ दूर हो गईं।
इस कथा से यही शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए शुक्र प्रदोष व्रत से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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