धान की फसल ने किसानों को डाला संकट में, 145 दिन वाली फसल 40 दिन में ही पकने लगी

सिद्धार्थनगर - के विकास खण्ड नौगढ़ के ग्राम पंचायत शिवपति नगर के टोला गौहनिया के किसानों के सामने इन दिनों एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यहां करीब 40 बीघा खेत में बोई गई धान की फसल समय से पहले ही पकने लगी है। किसानों को ब्लॉक से साभा धान 5204 किस्म का बीज दिया गया था, जिसकी अवधि 145 दिन बताई गई थी। लेकिन हैरानी की बात है कि यह धान महज 40 दिन में ही आधा पककर तैयार हो गया, जबकि आधा अभी भी कच्चा है। इससे किसानों की नींद उड़ गई है क्योंकि न तो पूरी तरह कटाई की स्थिति है और न ही फसल को खड़ा छोड़ना सुरक्षित लग रहा है। किसानों की दिक्कतें बढ़ीं शिवपतिनगर टोला गौहनिया के किसान बताते हैं कि पहले ही खाद की किल्लत से खेती करना मुश्किल हो गया था। अब धान की इस असामान्य स्थिति ने उनकी कमर तोड़ दी है।
किसान वीरेंद्र प्रताप चौधरी, राजेंद्र चौधरी, राजेश चौधरी, रामसरन गौतम और रामानंद चौधरी ने बताया कि यदि मौसम में बारिश या तेज हवाएं आईं तो फसल पूरी तरह चौपट हो सकती है।पूरे प्रदेश में यही समस्या
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिर्फ सिद्धार्थनगर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। समय से पहले पकने वाली धान की किस्म ने किसानों के मेहनत और सपनों पर पानी फेर दिया है।विधानसभा में उठा मुद्दा
इटवा विधानसभा के प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस गंभीर समस्या को विधानसभा में उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर किसानों को किस आधार पर यह बीज दिया गया, जिसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग भी की।किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार और विभागीय अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देंगे तो इस बार धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा और हजारों किसानों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
रिपोर्टर सुशील कुमार खेतान
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