सालों से राशन में कटौती का खेल! ग्राम चौपाल में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, दबंगई से दबाई जाती रही आवाज

सिद्धार्थनगर : शोहरतगढ़ तहसील अंतर्गतविकासखंड बर्डपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बजहां के नरखोरिया मजरे में आयोजित ग्राम चौपाल उस समय गरमा गई, जब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में वर्षों से चल रही कथित राशन घटतौली का मामला खुलकर सामने आ गया। चौपाल में मौजूद ग्रामीणों ने एक स्वर में आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय से तय मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है, लेकिन विरोध करने पर डर, दबाव और धमकी के जरिए चुप करा दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह खेल आज का नहीं बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा है। चौपाल में अपनी बात रखते हुए ग्रामीण रामू ने कहा—

बाप-दादाओं के जमाने से यही चलता आ रहा है। जो भी आवाज उठाता है, उसे ग्राम सभा से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग दबाव में लेकर चुप करा देते हैं। इसी डर की वजह से आज तक कोई खुलकर शिकायत नहीं कर पाया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि राशन वितरण में कटौती कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि नियमित और सुनियोजित तरीके से की जा रही है। कई कार्डधारकों ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति सवाल करता है तो उसे अगली बार राशन न मिलने या अन्य परेशानियों की धमकी दी जाती है।
डर का माहौल, इसलिए चुप है गांव चौपाल में मौजूद कई ग्रामीण खुलकर बोलने से कतराते नजर आए। उनका कहना था कि गांव में दबंग प्रभाव इतना है कि शिकायत करने वाले को सामाजिक और आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। यही कारण है कि राशन घटतौली जैसी गंभीर समस्या सालों से बनी हुई है। कोटेदार पक्ष ने किया इनकार वहीं, कोटेदार रऊफ के पौत्र मोबीन ने दूरभाष पर सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा—
राशन वितरण पूरी पारदर्शिता से किया जाता है। अगर किसी को कम राशन मिलता है तो वह तुरंत शिकायत करे। आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पूर्ति निरीक्षक बोले— ‘मामला दिखवाते हैं’
इस पूरे मामले पर पूर्ति निरीक्षक विंध्यवासिनी श्रीवास्तव ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामले को देखा जाएगा और जांच कराई जाएगी। सबसे बड़ा सवाल— अब तक विभाग क्या करता रहा यदि ग्रामीणों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सवाल बेहद गंभीर हो जाता है कि इतने वर्षों से राशन घटतौली के आरोपों पर विभागीय अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की क्या गांव के गरीबों का हक यूं ही कटता रहा और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्ति विभाग इस मामले को औपचारिक जांच तक सीमित रखता है या वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है।
ग्राम चौपाल में उठा यह मुद्दा अब पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
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रिपोर्टर : सुशील कुमार खेतान

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