स्वच्छता अभियान और पौधारोपण के बाद सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
सिद्धार्थनगर - जनपद सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ क्षेत्र स्थित टड़िया धाम में स्वच्छता अभियान के बाद सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।19 सितंबर 2026 को खंड विकास अधिकारी (BDO) विमल कुमार श्रीवास्तव की मौजूदगी में चलाए गए स्वच्छता अभियान के बावजूद गांव में गंदगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि नालियों से निकाला गया कूड़ा-कचरा उठाने के बजाय मौके पर ही छोड़ दिया गया, जो 11 अक्टूबर तक पड़ा रहा। वहीं, कई नालियों की नियमित सफाई नहीं होने की भी शिकायत है।मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से मोबाइल फोन पर वार्ता की गई। जिला विकास अधिकारी (DDO), सिद्धार्थनगर ने बताया कि इस संबंध में खंड विकास अधिकारी को सूचना दे दी गई है। वहीं, खंड विकास अधिकारी विमल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सहायक विकास अधिकारी (ADO) पंचायत को इस मामले में बता दिया है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारियों के स्तर से सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। 19 सितंबर को चला था स्वच्छता अभियान गौरतलब है कि 19 सितंबर 2026 को टड़िया धाम स्थित मंदिर श्री माता वैष्णो देवी में BDO विमल कुमार श्रीवास्तव ने पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाया था। इस दौरान सफाईकर्मियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया गया था।साथ ही पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल भी की गई थी। उस समय लोगों से सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने, स्वच्छता बनाए रखने और पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की गई थी। लेकिन अभियान के बाद सफाई व्यवस्था की स्थिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।नालियों से निकला कचरा नहीं हटने का आरोप स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के मुताबिक, स्वच्छता अभियान के दौरान नालियों से निकाला गया कूड़ा-कचरा समय से नहीं हटाया गया। आरोप है कि 19 सितंबर से 11 अक्टूबर तक करीब 21 दिन बीत जाने के बावजूद कचरा मौके पर पड़ा रहा। इसके अलावा गांव की कई नालियों की सफाई नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी हुई है।लंबे समय तक जमा कचरा और गंदा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकते हैं। इससे मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित सफाई और कचरे का समय से निस्तारण बेहद जरूरी है।सफाई अभियान के बाद निगरानी पर सवाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों की मौजूदगी में स्वच्छता अभियान चलाया गया था, तो उसके बाद नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी? नालियों से निकाले गए कचरे को समय से हटाने की जिम्मेदारी किसकी थी और इस कार्य की निगरानी किस स्तर से की जा रही थी?यदि शिकायतों में बताई गई स्थिति सही है, तो यह सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी और कचरा निस्तारण की प्रक्रिया की जांच का विषय है। हालांकि, संबंधित सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी, लापरवाही के कारणों और किसी अधिकारी की भूमिका के संबंध में आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।DDO ने BDO को दी सूचना, BDO ने ADO पंचायत को बताया मामले में जिला विकास अधिकारी, सिद्धार्थनगर से मोबाइल फोन पर वार्ता की गई। उन्होंने बताया कि खंड विकास अधिकारी को इसकी सूचना दे दी गई है। वहीं, BDO विमल कुमार श्रीवास्तव ने मोबाइल फोन पर वार्ता के दौरान बताया कि उन्होंने ADO पंचायत को मामले से अवगत करा दिया है। अब सवाल यह है कि संबंधित अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद गांव की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए कब तक कार्रवाई होती है। क्या मौके का निरीक्षण कर कूड़े का निस्तारण कराया जाएगा और नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी? यह देखना महत्वपूर्ण होगा।ग्रामीणों की मांग—तत्काल हो सफाई और नियमित निगरानी गांव की सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच मांग की जा रही है कि नालियों और सार्वजनिक स्थानों की तत्काल सफाई कराई जाए। लंबे समय से पड़े कूड़े को हटवाने के साथ ही नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को गंदगी और दुर्गंध से राहत मिल सके। अब मुख्य सवाल यही है कि स्वच्छता अभियान के बाद टड़िया धाम की सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाएगा और क्या शिकायतों की स्थलीय जांच कराई जाएगी?
रिपोर्टर - सुशील कुमार

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