SIR विवाद पर चुनाव आयोग का पलटवार, कहा- सभी फैसले बहुमत से और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत

AKANSHA UPADHYAY 

चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद देश की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अब चुनाव आयोग ने इन आरोपों और रिपोर्ट पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि आयोग का काम संविधान और कानून के मुताबिक होता है और उसके सभी आधिकारिक फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को जारी अपने प्रेस नोट में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है। आयोग के मुताबिक लिखित नोट, आपसी चर्चा, सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं।आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है। अंतिम निर्णय से पहले आयोग के सदस्यों को अपनी आपत्तियां, सुझाव और टिप्पणियां दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके आधिकारिक आदेश और निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 के प्रावधानों के अनुसार आयोग अपना काम करता है।

'सिर्फ कुछ आंतरिक नोट्स दिखाकर पूरी तस्वीर नहीं बताई जा सकती'

चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले कुछ समय में लिए गए निर्णयों के संदर्भ में केवल चुनिंदा आंतरिक नोट्स को सामने लाने से पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती।आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए गए हैं। इनमें देशभर में SIR की प्रक्रिया भी शामिल है। आयोग ने दावा किया कि ये सभी निर्णय पूरे आयोग के स्तर पर लिए गए हैं।ECI ने यह भी कहा कि किसी संस्थान के भीतर अधिकारियों के बीच सुझाव या मतभेद होना अपने आप में अंतिम निर्णय में असहमति का प्रमाण नहीं है। आयोग के मुताबिक विचार-विमर्श और अंतिम निर्णय के बीच अंतर समझना जरूरी है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, विवाद की शुरुआत एक जांच रिपोर्ट के बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा के डिजिटल प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।  रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECINet के जरिए मतदाता डेटा और चुनावी रोल के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में उन्होंने चुनावी रोल से जुड़े डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण पर चिंता जताई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में अपनी आपत्तियां कैबिनेट सचिव तक पहुंचाईं।

Form 6 को लेकर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में विशेष रूप से Form 6 में किए गए बदलाव का जिक्र किया गया है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।एक रिपोर्ट के   मुताबिक, SIR से संबंधित कुछ सवाल Form 6 में शामिल किए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि कानून में निर्धारित फॉर्म को केवल SIR के आदेश या दिशानिर्देश के आधार पर बदला नहीं जा सकता और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया जरूरी होगी। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से जारी ताजा बयान का जोर इस बात पर है कि आंतरिक विचार-विमर्श और अलग-अलग सुझाव आयोग की नियमित संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

विपक्ष ने उठाए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

 रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई दलों के नेताओं ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि यदि आयोग के भीतर ही महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की गई थीं, तो इन पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण होना चाहिए।

ECI ने कहा- संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में यह भी कहा कि देश में हाल के महीनों में कई बड़े चुनाव सफलतापूर्वक कराए गए हैं। आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी कराने का उल्लेख किया।डिजिटल सिस्टम को लेकर आयोग ने कहा कि उसके प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया संबंधित Electoral Registration Officers (ERO) और District Election Officers (DEO) के कानूनी अधिकारों के तहत होती है।आयोग ने अंत में कहा कि वह अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.