SIR विवाद पर चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण, नितिन नवीन ने कांग्रेस पर साधा निशाना

AKANSHA UPADHYAY 

 विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 को अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि 24 जून 2025 को SIR से संबंधित जारी आदेश को पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी और इसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।

आयोग के मुताबिक, हालिया विवाद में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र किसी नीतिगत फैसले या आयोग के IT विभाग से संबंधित नहीं थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे।

चुनाव आयोग के बयान के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि SIR के मुद्दे पर विपक्ष ने जनता को गुमराह किया और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों का आधार एक “गढ़ा हुआ झूठ” था। नवीन ने कहा कि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

नितिन नवीन ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना गंभीर विषय है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में होने पर वे प्रक्रिया की विश्वसनीयता स्वीकार करते हैं, जबकि विपरीत परिणाम आने पर संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं। ये आरोप बीजेपी अध्यक्ष ने लगाए हैं; कांग्रेस का पक्ष इससे अलग हो सकता है।

इसी बीच चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े मामलों में मतदाताओं की सुविधा को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार, जिन लोगों को अनमैप्ड या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस दिया गया है, उनके दस्तावेज लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी घर जा सकते हैं। ऐसे लोगों को सामान्य परिस्थितियों में ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। असाधारण मामलों में सुनवाई ऑनलाइन कराने का प्रावधान रखा गया है।

आयोग ने यह भी बताया कि SIR 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है। वहीं, जिन पात्र मतदाताओं का नाम छूट गया है, वे लगातार मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इस तरह SIR को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच जारी है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं, जबकि विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.