यूपी SI भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ विवाद: सवाल से राजनीति और सामाजिक भावनाओं तक — जांच और प्रतिक्रियाओं का गहराता मुद्दा

यूपी में चल रही उत्तर प्रदेश पुलिस सब‑इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2026 के प्रश्न पत्र में एक शब्द को लेकर विवाद तूल पकड़े हुए है। परीक्षा के एक प्रश्न में “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” का सही पर्याय बताने को कहा गया था, जिसमें विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल किया गया। यह शब्द पारंपरिक रूप से एक विद्वान या ज्ञानी व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन इसे एक नकारात्मक अर्थ से जोड़कर दिए जाने पर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब इस सवाल का पेपर वायरल हुआ और कई उम्मीदवारों तथा सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि ‘पंडित’ शब्द को नकारात्मक या अवसरवादी व्यक्तित्व के विकल्प के रूप में देना आपत्तिजनक है। इसे ब्राह्मण समुदाय तथा विद्वानों के प्रति अवमानना के रूप में देखा गया। विरोध के बाद भाजपा के कई नेताओं ने भी इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि परीक्षा से जुड़े प्रश्नों में इस तरह के अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और उन्होंने तुरंत जांच की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने कहा कि हर नागरिक की गरिमा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भर्ती बोर्ड के चेयरपर्सन्स को निर्देश दिए कि किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय के प्रति अनुचित टिप्पणी न की जाए। उन्होंने परीक्षा की समीक्षा और प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा का भी आदेश जारी किया है ताकि भविष्य में ऐसे विवादों को रोका जा सके।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। भाजपा विधायक पी. एन. पाठक ने इस विवाद में गहन जांच और जवाबदेही तय करने की मांग मुख्यमंत्री को ट्वीट करके की है। वहीं कुछ संगठनों एवं समूहों ने भी इस घटना को सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए आलोचना की है।

दूसरी ओर, कुछ आलोचक और विशेषज्ञ यह तर्क दे रहे हैं कि शब्द का चयन शायद संदर्भ की तकनीकी भूल या गलत व्याख्या का परिणाम हो सकता है, न कि किसी विशेष समूह के खिलाफ पूर्वाग्रह। सोशल मीडिया पर कई उम्मीदवारों ने कहा है कि ‘पंडित’ का अर्थ विद्वान होता है और यह शब्द हमेशा जाति से जुड़ा नहीं है।

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब यूपी SI परीक्षा के पहले दिन पाँच लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे और परीक्षा शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई थी। हालांकि सवाल के इस शब्द को लेकर अब तक विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक स्थायी आदेश नहीं आया है, परंतु जांच जारी है और भर्ती बोर्ड ने इस विषय की गंभीरता से समीक्षा की बात कही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द, विकल्प और भाषा कितनी संवेदनशील और संस्कृति‑सटीक हैं। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा जैसे गंभीर मंच पर शब्दों के चयन और उनके सामाजिक प्रभावों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, अन्यथा इससे छात्रों के साथ-साथ समुदायों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

आगे की कार्रवाई में यह देखना रह जाएगा कि क्या UP Police Recruitment Board अपने प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में सुधार करेगा, प्रश्नों की समीक्षा समिति का गठन करेगा और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश जारी करेगा। यह मामला सिर्फ एक शब्द का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

 

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