1 करोड़ 50 लाख से बनकर तैयार है अस्पताल,कई माह से अपने उद्घाटन के इंतजार कर रही है बिल्डिंग
सिवनी मालवा - हर नागरिक का मौलिक अधिकार है कि उसे अच्छी शिक्षा,अच्छा स्वास्थ्य लाभ मिले वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली शासकीय योजनाओं का लाभ मिले यही प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री का सपना होता है कि सरकार की सभी योजनाओं का लाभ आखिरी तपके के लोगों तक पहुंचे ! लेकिन क्या इन सबके बीच की कार्य योजना इस पूरी योजनाओं को धरातल पर सरकार के सपनों को साकार कर रहा है या नहीं आज हम इसका जीता जागता उदाहरण आदिवासी अंचल को समेटे हुए ग्राम लोखरतलाई से करते हैं !
सिवनी मालवा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम लोखरतलाई में उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 1 करोड़ 50 लाख की लागत से बनी नई बिल्डिंग करीब छ माह पहले बनकर तैयार हो चुकी है। भवन में मरीजों के इलाज से लेकर स्टाफ के रहने तक की सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य केंद्र अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसका परिणाम यह है कि गांव लोखरतलाई से लगे आदिवासी अंचल के करीब 40 गांव के लोग बीमार पड़ने पर अपना इलाज झोलाछाप डॉक्टरों से करा रहे हैं । स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग में अधिकांश काम पूरे हो चुका हैं। बिजली विभाग की ओर से भी अपना काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन कनेक्शन चालू नहीं होने से भवन उपयोग में नहीं आ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों की पदस्थापना भी नहीं की गई है। इस स्वास्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर और चार स्टाफ के रहने के लिए क्वार्टर भी बनाए गए हैं लेकिन वह भी खाली पड़े हुए अब इस स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर आदिवासी लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है !
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण झोलाछाप डॉक्टर काट रहे हैं चांदी
अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों मौसमी बीमारी का प्रकोप तेजी से फैल रहा है जिसके कारण हर ग्राम में लोग बीमार पड़े हुए हैं मजबूरी के कारण आदिवासी अंचल के बीमार लोग इन झोलाछाप डॉक्टरों से अपना इलाज करते हुए देखे जा सकते हैं हर रोज उनके क्लीनिक पर जमकर भीड़ लगी हुई रहती है इस और स्वास्थ्य विभाग का कोई ध्यान नहीं जिसके कारण यह बगैर डिग्री के डॉक्टर जमकर चांदी काट रहे हैं यही स्थिति ग्राम नंदरबाड़ा मे बगैर डिग्री के डॉक्टरो के आलीशान क्लिनिको में देखी जा सकती है जहां पर गंभीर से गंभीर बीमारियों का भी इलाज कर डालते हैं !
ग्रामीणों के अनुसार गांवों में बाहर से आकर कई लोग किराए के मकानों में कथित तौर पर इलाज कर रहे हैं। इनमें से कुछ ने अब जमीन खरीदकर दो मंजिला मकान तक बना लिए हैं और वहीं दवाखाना संचालित कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे लोगों की क्लीनिकों पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होती है आखिर इनको किनका संरक्षण है यह लोगों के जहन में यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है। वही ग्रामीणों का आरोप है कि इन कथित झोलाछाप डॉक्टरों के पास सभी प्रकार की दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं, जबकि कुछ के पास चिकित्सकीय डिग्री और आवश्यक दस्तावेज होने को लेकर भी सवाल हैं।
गांव गांव में प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों की जांच ना होना एक बड़ा सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई गांवों में एक नहीं बल्कि दो से तीन कथित झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनके क्लीनिकों की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नया स्वास्थ्य केंद्र समय पर शुरू हो जाए और पर्याप्त स्टाफ की पदस्थापना कर दी जाए तो 40 गांवों के लोगों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जो अपना इलाज सरकारी अस्पताल के खुलने के बाद सभी लोग वहीं जाएंगे
इनका कहना है,,
बिल्डिंग तो तैयार है स्टाफ की कमी होने के कारण स्वास्थ्य केंद्र चालू नहीं हो पाया है जैसी ही स्टाफ आता है स्वास्थ्य केंद्र चालू कर दिया जाएगा!
डॉ. नरसिंह गहलोत सीएमएचओ नर्मदापुरम
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोखरतलाई के नवनिर्मित भवन में बिजली व्यवस्था नहीं होने के संबंध स्वास्थ्य विभाग और एसडीएम कार्यालय की ओर से विद्युत विभाग को आवेदन दिया जा चुका है। बिजली कनेक्शन होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को नए भवन में सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा।
डॉ. कांति भास्कर बीएमओ सिवनी मालवा
कई दिनों से स्वास्थ्य विभाग की बिल्डिंग बनकर तैयार है अब कंडीशन यह हो गई है कि आसामाजिक तत्वों द्वारा बिल्डिंग की खिड़कियां तोड़ दी गई हैं जल्द से जल्द स्वास्थ विभाग को इस और ध्यान देने की आवश्यकता है अगर अस्पताल चालू हो जाएगा तो बीमार लोग अपना इलाज करवा पाएंगे
रिपोर्टर - संतोष सिंह
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