बरसात में भिंडी की खेती: कम लागत, बड़ा मुनाफा
बरसात के मौसम में भिंडी की मांग बाजार में काफी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को इसका बहुत अच्छा दाम मिलता है। बस्तर के किसान सुखदास मौर्य इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं, जो अपने खेत में लगभग ढाई एकड़ में सामान्य तरीके से भिंडी की खेती कर रहे हैं। इस पारंपरिक और सरल विधि से खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें लागत बेहद कम आती है और मुनाफा बहुत अधिक होता है। सुखदास को इस सीजन में अपनी भिंडी की फसल से बहुत अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है।
खेती की तैयारी और रोपाई का सही तरीका
भिंडी की अच्छी उपज के लिए खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी है। सुखदास बताते हैं कि उन्होंने अपने खेत में सबसे पहले दो बार हल चलाया और उसके बाद मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए एक बार रोटावेटर का उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने खेत में सही तरीके से क्यारियां बनाईं। पौधों को पर्याप्त जगह देने के लिए लाइन (चौड़ाई) से लाइन की दूरी 1 फीट रखी गई है, जबकि पौधे से पौधे के बीच की दूरी 4 से 5 इंच निर्धारित की गई है। उन्होंने अपने खेत में 'वियेनार' किस्म की भिंडी लगाई है, जो मात्र 35 दिनों में फल देना शुरू कर देती है।
खाद प्रबंधन और प्रमुख बीमारियों से बचाव
फसल को पोषण देने के लिए इस खेती में गोबर की खाद के साथ-साथ डीएपी , यूरिया, पोटाश और 19:19:19 घुलनशील खाद का संतुलित उपयोग किया गया है। वैसे तो इस मौसम में भिंडी की फसल में बीमारियों का प्रकोप बहुत ज्यादा नहीं देखा जाता, लेकिन 'तना छेदक' (Stem Borer) बीमारी का खतरा बना रहता है। इस समस्या से अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए सुखदास अपने खेतों में '12 ज्वाइंट' का छिड़काव करते हैं, जिससे कीटों पर प्रभावी नियंत्रण रहता है।
कुल लागत, कमाई और बहुआयामी खेती
ढाई एकड़ में फैली भिंडी की इस फसल को तैयार करने में लगभग 25 हजार रुपये की कुल लागत आई है। यह फसल करीब चार महीने तक लगातार उत्पादन देगी, जिससे सुखदास को लगभग ढाई लाख रुपये तक की शानदार आमदनी (मुनाफा) होने का अनुमान है। गौरतलब है कि सुखदास सिर्फ भिंडी पर ही निर्भर नहीं हैं; उन्होंने अपने खेतों में भिंडी के साथ-साथ टमाटर, बैंगन और खीरा जैसी अन्य सब्जियां भी लगाई हैं, जिससे वे हर साल लाखों रुपये की तगड़ी कमाई कर रहे हैं।
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