सोनम वांगचुक ने क्यों खत्म किया अनशन? सरकार के बड़े आश्वासन का खुलासा!
दिल्ली की तपती सड़कों से लेकर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल तक, नीट पेपर लीक की आग में जलते देश के बीच जो सबसे बड़ा हाई-वोल्टेज सियासी और सामाजिक ड्रामा चल रहा था, उसका एक पड़ाव आखिरकार आ ही गया! जी हां 28 जून से कॉकरोच जनता पार्टी और उग्र प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में अन्न-जल त्यागे बैठे मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के लंबे आमरण अनशन के बाद आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है. मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने खुद पहुंचकर वांगचुक को जूस पिलाया और सरकार का आश्वासन पत्र सौंपा. लेकिन रुकिए, ये कहानी इतनी सीधी नहीं है! जहां एक तरफ पीएम मोदी ने वांगचुक की सेहत पर चिंता जताते हुए ट्वीट किया, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के तीखे तंज ने इस पूरे घटनाक्रम में एक नया सियासी भूचाल ला दिया है!
दरअसल, जब सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी और देश भर में छात्रों का गुस्सा आउट ऑफ कंट्रोल होने लगा, तो दिल्ली के सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया. रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच पीएमओ में करीब चार घंटे तक एक बेहद गुप्त और उच्चस्तरीय बैठक हुई. जहां इस मैराथन मीटिंग के बाद सरकार ने रणनीति बदली और अमित शाह के निर्देश पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीधे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो से फोन पर बात की और भरोसा दिया कि सरकार उनकी मांगों को लेकर बेहद गंभीर है. इसके बाद जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तुरंत गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे जहाँ सफदरजंग से दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को भर्ती कराया गया था.
वहां मंत्रियों ने अस्पताल के कमरे में ही वांगचुक की पत्नी और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सरकार का रुख साफ किया और अनशन तुड़वाया. आपको बता दें CJP और सोनम वांगचुक का रुख इतना सख्त था कि उन्होंने जेपी नड्डा के घर या दफ्तर में बैठक करने का सरकारी न्योता सिरे से ठुकरा दिया था. वे किसी निष्पक्ष जगह पर बात करने की जिद पर अड़े थे. जिसके बाद सरकार को झुकना पड़ा और अब दिल्ली के 'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया' में CJP के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक वार्ता तय हुई है. आपको बता दें सरकार ने वांगचुक को इन बातों का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया है। जिसमें...
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और संसद मार्च में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे या नए मुकदमे नहीं होंगे.
पेपर लीक के तनाव में आत्महत्या करने वाले मासूम छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सरकार सकारात्मक विचार करेगी.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा तैयार किया गया नया 'परीक्षा सुधार विधेयक' तुरंत लाया जाएगा, जिसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा.
वहीं जैसे ही वांगचुक के अनशन तोड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, राजनीति गरमा गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'X' पर लिखा: "मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें. मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि सोनम जी स्वस्थ रहें."
लेकिन टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तस्वीरें देखते ही कड़ा प्रहार कर दिया! उन्होंने वांगचुक को सलाह देते हुए कहा...
"प्रिय सोनम वांगचुक जी, हम आपका सम्मान करते हैं, लेकिन अगर अनशन तोड़ना ही था तो किसी और के हाथ से तोड़ लेते सर, दिखावे और संदेश नाम की भी कोई चीज होती है! नड्डा जी के हाथ से जूस पीकर आपने अपनी नैतिक बढ़त कम कर दी. यह आंदोलन बहुत बड़ा है, और जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, लड़ाई जारी रहेगी!"
वहीं दूसरी तरफ अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने साफ किया है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी. देश में कोई हिंसा न भड़के, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है. वांगचुक ने अपने समर्थकों और देश के युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के बहकावे में न आएं और आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखें. वे लद्दाख लौटने से पहले आंदोलनकारी छात्रों से मिलेंगे और सरकार के आश्वासनों पर भरोसा बनाए रखने को कहेंगे.
देखा जाए तो भले ही सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी हो और सरकार राहत की सांस ले रही हो, लेकिन नीट पेपर लीक मामले का जिन्न अभी पूरी तरह बोतल में बंद नहीं हुआ है. सीजेपी, विपक्षी दल और सड़कों पर डटे लाखों छात्र आज भी एक ही जिद पर अड़े हैं...."धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा!" ऐसे में अब हर किसी की नजरें कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली सरकार और सीजेपी की इस हाई-प्रोफाइल बैठक के फैसले पर टिकी हैं. क्या सरकार का यह आश्वासन कार्ड काम कर जाएगा, या फिर विपक्ष और छात्रों का यह बवंडर दिल्ली की गद्दी को और जोर से हिलाएगा? सियासी पारा अभी उफान पर है और ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ है!
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