“75 साल बाद भी जंगल पार कर पढ़ाई! बेलहत्थी के मासूमों की शिक्षा पर सिस्टम की बेरुखी”
सोनभद्र : ओबरा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजादी के 75 साल बाद भी बेलहत्थी ग्राम पंचायत के टोला-आमी में बच्चों को पढ़ाई के लिए 7 किलोमीटर तक जंगल पार करना पड़ रहा है। अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने गांव में स्कूल निर्माण की मांग तेज कर दी है।
पूरी खबर : सोनभद्र के ओबरा तहसील अंतर्गत आदिवासी बहुल बेलहत्थी ग्राम पंचायत का टोला-आमी आज भी बुनियादी शिक्षा व्यवस्था से कोसों दूर है। यहां के मासूम बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर घने जंगलों के रास्ते करीब 7 किलोमीटर दूर खरछनवा और कोडरी के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। कई बार हादसे जैसी स्थितियां भी सामने आ चुकी हैं, जिसके चलते अभिभावकों में हमेशा डर का माहौल रहता है।
इसी गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने अपना दल एस युवा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय नवनिर्माण सेना ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द पटेल दयालु को ज्ञापन सौंपकर गांव में प्राथमिक विद्यालय निर्माण की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आदिवासी और दलित बाहुल्य इस बस्ती को दशकों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा आज तक नहीं पहुंच सकी। उनका कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, योजनाएं बनती रहीं, लेकिन टोला-आमी के बच्चों की तकदीर नहीं बदली।
मामले को गंभीर बताते हुए आनन्द पटेल दयालु ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गांव में स्कूल निर्माण के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर मामला प्रदेश सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
इस दौरान अल्पसंख्यक मंच के प्रदेश सचिव महताब आलम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। गांववासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। "जहां एक तरफ डिजिटल इंडिया और स्मार्ट शिक्षा की बातें हो रही हैं, वहीं सोनभद्र के इस आदिवासी गांव में बच्चे आज भी जंगल पार कर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। सवाल ये है कि आखिर जिम्मेदारों की नींद कब टूटेगी?"
रिपोर्टर : कुम्धज चौधरी

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