दिल्ली में महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर उबाल, राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषदने राष्ट्रपति से मांगी निष्पक्ष जांच,ओबरा उपजिलाधिकारी को सौपा ज्ञापन।

सोनभद्र :  दिल्ली के साकेत थाना क्षेत्र में कवरेज के दौरान स्वतंत्र महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पत्रकार संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटना से संबंधित कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महामहिम राष्ट्रपति से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

बताया जा रहा है कि दोनों महिला पत्रकार दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम की कवरेज कर रही थीं। इसी दौरान साकेत थाना क्षेत्र के कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि दोनों पत्रकारों को पुलिस वाहन से साकेत थाना ले जाया गया, जहां उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों पत्रकारों को अलग-अलग कमरों में ले जाकर उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी की बात भी कही गई है।


घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पत्रकार समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल दो महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।


परिषद का कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पत्रकारों के साथ हिंसा अथवा दुर्व्यवहार की घटनाएं प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती हैं। संगठन ने कहा कि देश में पत्रकारों के साथ लगातार सामने आ रही कथित उत्पीड़न की घटनाओं को गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति से उच्चस्तरीय जांच की मांग

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ने ओबरा उपजिलाधिकारी को पत्र सौप कर  महामहिम राष्ट्रपति से पूरे प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद ने कहा कि जांच में जो भी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही दोनों महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में पत्रकारों के साथ इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
परिषद ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना ही पत्रकारों में विश्वास कायम कर सकता है।


रिपोर्टर :  कुम्धज चौधरी

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