आदिवासी युवाओं और बच्चों ने उठाई जल-जंगल-जमीन बचाने की आवाज, कहा- पुरखों की विरासत को उजड़ने नहीं देंगे

सोनभद्र। विधानसभा क्षेत्र 401 के नगवा ब्लॉक अंतर्गत कोदयी खास गांव में आदिवासी Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं व बच्चों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को लेकर आवाज बुलंद की। ‘पेड़ हैं तो प्राण हैं’ आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग सड़क पर उतरे और पर्यावरण तथा अपनी पुश्तैनी जमीन-जंगल को बचाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रधानमंत्री से अपील की कि जल, जंगल, जमीन, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधनों को उजाड़ने से बचाया जाए। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों ने कहा कि जल-जंगल-जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति, परंपरा और पूर्वजों की विरासत से जुड़ी हुई है। वक्ताओं ने विकास कार्यों के नाम पर जंगल और पहाड़ों के प्रभावित होने को लेकर चिंता जताई तथा संरक्षण की मांग की। विनय कुमार गोंड़ ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उनके पुरखों की विरासत है। इसे तहस-नहस नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाया गया तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए बाध्य होंगे।
गणेश गोंड़ ने कहा कि जल और जंगल आदिवासी समाज की विरासत हैं। उन्होंने इन प्राकृतिक संसाधनों को उजाड़े जाने से बचाने की अपील की।

वहीं प्रिया गोंड़ ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि उनके पेड़, पानी, पहाड़ और जल-जंगल-जमीन को न उजाड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए जरूरी है। संतोष गोंड़ ने कहा कि जल, जंगल और जमीन ही आदिवासी समाज की पहचान है। इसे तहस-नहस नहीं किया जाना चाहिए। चंद्रावती गोंड़ ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उनकी परंपरा का हिस्सा हैं और वे अपनी इस विरासत को किसी भी कीमत पर जाने नहीं देंगे। सूर्य प्रकाश खरवार ने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता जल, जंगल और जमीन से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इसके संरक्षण के लिए वे हर संभव संघर्ष करेंगे और जंगलों को कटने से बचाने की आवाज लगातार उठाते रहेंगे।

गुरुजी चेरो ने कहा कि उनके पूर्वज और धरती आबा बिरसा मुंडा जंगल और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पूर्वजों द्वारा बचाए गए जंगलों को नष्ट करने का प्रयास किया गया तो आदिवासी समाज उसका प्रतिकार करेगा। कार्यक्रम में बसमतिया चेरो, मुन्नी खरवार, बैजनाथ, बाबूलाल, रामचंदर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा आदिवासी Gen-Z और Gen-Alpha के युवा एवं बच्चे मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा केवल वर्तमान पीढ़ी का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा सवाल है। इसी उद्देश्य से ‘पेड़ हैं तो प्राण हैं’ अभियान के माध्यम से गांव-गांव लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।


रिपोर्टर - कुम्धज चौधरी

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