सपा-भाजपा आमने सामने...यूपी की राजनीति में सियासी उबाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने हैं। इस बार विवाद का केंद्र बिंदु हैं सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल है जिनकी भाजपा नेताओं से बढ़ती नजदीकियों ने नया राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है।

सपा का भाजपा पर तंज-

शुक्रवार को सपा ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि भाजपा पूजा पाल के साथ खड़ी है और उनके आरोपों को तवज्जो दे रही है, तो बेहतर होगा कि उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर जल्द ही मंत्रिमंडल में जगह दे। पार्टी ने इसे भाजपा की "राजनीतिक उपयोगिता की नीति" करार दिया।

भाजपा कभी हराने में लगी थी, अब गले लगा रही है-

सपा ने याद दिलाया कि भाजपा वही पार्टी है, जो कभी पूजा पाल को हराने के लिए पूरी ताकत झोंकती थी। लेकिन अब उन्हीं का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि यह बदली हुई राजनीति जनता भी देख रही है और समय आने पर उसका जवाब देगी।

पूजा पाल के राजनीतिक सफर की याद-

सपा ने बयान में कहा कि पार्टी ने ही पूजा पाल को विधायक का टिकट देकर राजनीति में स्थापित किया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन निजी कारणों और दूसरी शादी को लेकर उन्होंने खुद ही चुनाव न लड़ने का फैसला किया था।

निजी फैसलों का किया सम्मान-

सपा का कहना है कि पूजा पाल के निजी फैसलों, जैसे दूसरी शादी हो या अब भाजपा से नजदीकी, इनसे पार्टी ने हमेशा खुद को दूर रखा और उनके निर्णयों का सम्मान किया। पार्टी ने यह भी कहा कि वह पूजा पाल के उज्ज्वल भविष्य और लंबी उम्र की कामना करती है।

भाजपा को सदस्यता और मंत्रिपद देने की सलाह-

सपा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में भाजपा से कहा कि अगर पूजा पाल पर इतना भरोसा है, तो उन्हें पार्टी की सदस्यता देकर मंत्री बना देना चाहिए। साथ ही सपा से निष्कासित अन्य विधायकों को भी भाजपा में शामिल कर मंत्री पद दिया जाए।

जनता सब देख रही है-

समाजवादी पार्टी का कहना है कि भाजपा, जो अक्सर दलित और पिछड़ा वर्ग विरोधी नीतियों के लिए आलोचना का शिकार रही है, अब उन्हीं वर्गों से आए नेताओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। पार्टी का दावा है कि जनता इस राजनीतिक खेल को समझती है और वक्त आने पर जवाब देगी।

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