बरेली में भड़की हिंसा की चिंगारी, देश को दो टुकड़ो में विभाजित करने की कोशिश

बरेली में शुक्रवार को चार बजे ही थे कि मौलाना तौकीर रजा के प्रदर्शन में शामिल होकर लौटते करीब डेढ़ से दो हजार की संख्या में समर्थकों ने हमला कर दिया .पटरी पर लगी दुकानों के सामान तहस-नहस कर करते हुए सड़क पर खड़ी मोटरसाइकिलों को गिरा दिया .और दंगाईयों की भीड़ साहू गोपीनाथ कॉलेज से आगे बढ़ते हुए श्यामगंज चौराहे से एक बुजुर्ग दुकानदार को अपना पहला निशाना बनाया. और फिर रास्ते में मिलने वाले लोगों को पीटते हुए आगे बढ़ती गई। गुस्से की आग में जल रही भीड़  ये नही देख रही थी कि कौन दोषी है कौन निर्दोष बस सब पर हमला करती जा रही थी . बरेली में भड़की इस हिंसा की चिंगारी की वजह से देश की शांति व्यवस्था काफी हद तक भंग हो गई है.इस हिंसा के पीछे मुख्य लक्ष्य हिन्दू -मुस्लिम दरार पैदा करना और देश को दो हिस्सों में विभाजित करना .लेकिन पुलिस प्रशासन के तैनात होने के चलते हिंसा को बढ़ावा देने वालों को पूरी तरह से सफलता नही मिल पा रही है . 

बरेली में क्यों हुई हिंसा 
ज्ञानवापी और ईदगाह को लेकर मौलाना तौकीर रज़ा द्वारा जेल भरो आंदोलन चलाया गया जिसमे समर्थन देने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे थे .क्योंकि मौलाना तौकीर रज़ाके द्वारा जेल भरो आंदोलन को लेकर इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) की द्वारा जगह-जगह पर्चे बांटे गए थे.पर्चे के जरिए मुसलमानो से अपील की गई थी कि अब वक्त आ गया है की हमे ज्ञानवापी समेत अपनी मस्जिदों, मदरसों, मजारों और मुसलमानों को लिंचिंग से बचाना है.वहीं दूसरी तरफ जेल भरो आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी किये गये .लेकिन इसके बावजूद भी बरेली में जेल भरो आंदोलन से वापस आ रहें उपद्रवियों ने हमला बोल दिया . और देश की शांति व्यवस्था की भंग करें की कोशिश की.मौलाना तौकीर रज़ा द्वारा चलाये गए जेल भरो आंदोलन के चलते बरेली में हिंसा की चिंगारी भड़की .

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