SSC GD परीक्षा में हाईटेक सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, 4-4 लाख में बिक रहा था पेपर!

नीट और CBSE के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि देश में परीक्षाओं को आयोजित कराने वाला पूरा का पूरा सिस्टम एक बार फिर वेंटिलेटर पर जाता हुआ दिख रहा है। जी हां, इस बार कर्मचारी चयन आयोग यानि SSC की कांस्टेबल GD परीक्षा में भारी प्रशासनिक लापरवाही, घोर कुप्रबंधन और महा-फर्जीवाड़े का एक ऐसा डरावना मामला सामने आया है जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और झारखंड तक हड़कंप मचा दिया है! परीक्षा केंद्रों पर सीट अलॉटमेंट की ऐसी ऐतिहासिक और ब्लंडर गलतियां की गईं कि देखते ही देखते परीक्षा केंद्र ज्ञान के मंदिर से रणक्षेत्र में तब्दील हो गए। नाराज अभ्यर्थियों का गुस्सा ऐसा फूटा कि कहीं कंप्यूटर और मुख्य सर्वर के परखच्चे उड़ा दिए गए, तो कहीं नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया गया। इतना ही नहीं, UP STF ने इस ऑनलाइन परीक्षा में चल रहे 4-4 लाख रुपये के पेपर लीक और हाईटेक सॉल्वर गैंग का भी भंडाफोड़ कर दिया है! आइए जानते हैं इस महा-बवाल की पूरी इनसाइड स्टोरी कि आखिर कैसे युवाओं के भविष्य को एक मजाक बनाकर रख दिया गया है!

आपको बता दें सबसे भयानक और खौफनाक मंजर देखने को मिला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में। प्रयागराज के गंगापार सरायइनायत के अंदावा स्थित सुनीता सिंह सीता सिंह महिला महाविद्यालय के परीक्षा केंद्र पर उस वक्त महा-बवाल हो गया, जब सीटों के आवंटन में एक ऐसी गलती सामने आई जिसे सुनकर आप भी माथा पकड़ लेंगे। इस परीक्षा को कराने की पूरी जिम्मेदारी बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी एडूक्विटी कैरियर टेक्नोलॉजिस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी। इस सेंटर पर कुल क्षमता महज 650 कंप्यूटर सिस्टम की थी। लेकिन चयन प्रक्रिया का मखौल उड़ाते हुए कंपनी ने दूसरी पाली में 505 के स्थान पर 1,035 अभ्यर्थियों को यह सेंटर अलॉट कर दिया! हद तो तब हो गई जब तीसरी पाली में भी 495 के स्थान पर 1,034 परीक्षार्थियों का सेंटर यहीं डाल दिया गया। केंद्र व्यवस्थापकों का कहना है कि उन्हें इस अतिरिक्त आवंटन की जानकारी सोमवार को ही ईमेल के जरिए मिली थी, जिसके कारण इतने कम समय में व्यवस्था करना मुमकिन नहीं था। वहीं भीषण और तपती गर्मी में चित्रकूट, अयोध्या, मऊ और फतेहपुर जैसे दूर-दराज के जिलों से रात-रात भर का सफर तय करके जब छात्र सेंटर पहुंचे और उन्हें पता चला कि बैठने के लिए सिस्टम ही नहीं है, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। 

आक्रोशित अभ्यर्थियों ने परीक्षा कक्षों के भीतर घुसकर तांडव मचाना शुरू कर दिया। कमरों में रखे दर्जनों कंप्यूटर, मॉनिटर, कीमती मुख्य सर्वर, लैपटॉप और कुर्सियों को बेरहमी से तोड़ दिया गया। कमरों में लगे एसी, कूलर, सीसीटीवी कैमरे, जनरेटर और वाटर कूलर तक को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि कुछ छात्र गुस्से और अफरा-तफरी में CPU और टीएफटी मॉनिटर तक उठाकर भागने लगे। मौके पर तैनात पुलिस ने एक छात्र को रंगे हाथों लैपटॉप लेकर भागते हुए हिरासत में लिया है। वहीं जैसे ही हंगामा बढ़ा, परीक्षा करा रही बेंगलुरु की प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। अपनी जिम्मेदारी संभालने में नाकाम यह पूरी परीक्षा टीम सेंटर पर छात्रों को भगवान भरोसे छोड़कर दुम दबाकर भाग खड़ी हुई! जहां कंपनी के भागने के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। नाराज छात्रों ने जैन मंदिर के सामने जीटी रोड पर चक्काजाम कर दिया। करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक हाईवे पूरी तरह ठप रहा और गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।

सूचना मिलते ही ट्रेनी आईपीएस ईश्वर लाल गुर्जर, एसीपी थरवई अरुण पराशर, एसीपी फूलपुर विवेक यादव और सरायइनायत थानाध्यक्ष संजय गुप्ता भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आक्रोशित अभ्यर्थियों को बमुश्किल समझा-बुझाकर और हल्का बल प्रयोग कर हाईवे से हटाया और ट्रैफिक बहाल कराया। आखिरकार, एसएससी ने परीक्षा केंद्र पर नोटिस चस्पा कर प्रभावित उम्मीदवारों की परीक्षाएं आगामी तारीखों पर रीशेड्यूल करने का आश्वासन दिया, तब जाकर छात्र शांत हुए। लेकिन आपको बता दें प्रयागराज ही नहीं, प्रशासनिक नाकामी की आग बिहार तक फैल चुकी थी। 
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बीबी कॉलेज परिसर स्थित परीक्षा केंद्र पर भी भारी बवाल हुआ। यहां बिना किसी आधिकारिक वेबसाइट नोटिस के अचानक दूसरी और तीसरी पाली की परीक्षा रद्द कर दी गई। दूर-दूर से आए छात्रों को सीधे लाउडस्पीकर से परीक्षा रद्द होने की बात कही गई, जिससे छात्र भड़क गए। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब पहली शिफ्ट की परीक्षा शांति से हो गई, तो हमारी शिफ्ट को बिना किसी लिखित कारण के क्यों रोका गया? वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सेंट एंड्रयूज कॉलेज परीक्षा केंद्र पर सीट मिसमैच और रोल नंबर की गलत टैगिंग के कारण बड़ी संख्या में देहाती इलाकों से आए अभ्यर्थियों को गेट के भीतर घुसने से ही मना कर दिया गया। छात्रों ने कॉलेज गेट पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और कहा कि प्रशासन की गलती की सजा छात्रों को क्यों दी जा रही है?

वहीं इस कुप्रबंधन के बीच जो सबसे डरावना और चौंकाने वाला मोड़ आया, वो था उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स का एक्शन। जब देश ऑनलाइन परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित मानता है, तब एसटीएफ ने एसएससी जीडी परीक्षा में चल रहे एक बहुत बड़े हाईटेक सॉल्वर गैंग और पेपर लीक रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। एसटीएफ को लगातार इनपुट्स मिल रहे थे कि कुछ लोग ऑनलाइन परीक्षा को रिमोट एक्सेस या अन्य हाईटेक तरीकों से हैक कर धांधली कर रहे हैं। इस पर एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने गुप्त जांच शुरू की। एसटीएफ ने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क इलाके में स्थित 'बालाजी डिजिटल जोन' परीक्षा केंद्र पर छापेमारी की, जो इस फर्जीवाड़े का मुख्य अड्डा बना हुआ था। एसटीएफ ने मौके से 50 लाख रुपये नगद के साथ गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को धर दबोचा। ये आरोपी मुजफ्फरनगर, मथुरा, बुलंदशहर और बागपत के रहने वाले हैं, जिनमें से दो आरोपी खुद परीक्षा हॉल के भीतर बैठकर पेपर सॉल्व कर रहे थे। इस गिरोह के तार सिर्फ यूपी तक ही नहीं बल्कि झारखंड तक जुड़े हैं। नोएडा से 7 और रांची से 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो पैसे लेकर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा पास कराने का ठेका लेते थे। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि यह पेपर 4-4 लाख रुपये में बेचा जा रहा था! दरअसल, कर्मचारी चयन आयोग की यह कांस्टेबल जीडी भर्ती परीक्षा चार अलग-अलग शेड्यूल में आयोजित की जा रही है:

पहला चरण: 27 अप्रैल से 2 मई 2026
दूसरा चरण: 4 मई से 9 मई 2026
तीसरा चरण: 18 मई से 23 मई 2026
चौथा चरण: 25 मई से 30 मई 2026

वहीं इस महा-धांधली, पेपर लीक और भारी कुप्रबंधन को देखते हुए परीक्षा दे चुके और जिनका एग्जाम होने वाला है, दोनों ही तरह के अभ्यर्थी गहरे तनाव और चिंता में हैं। छात्र सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस पूरी परीक्षा को निरस्त कर री-एग्जाम कराने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, एसएससी की तरफ से परीक्षा पूरी तरह कैंसिल करने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन एक नया नोटिस जारी कर 28 मई को होने वाली परीक्षा को 27 मई को कराने का फेरबदल जरूर किया गया है।

देखा जाए तो कर्मचारी चयन आयोग की इस परीक्षा ने एक बार फिर देश के खोखले परीक्षा सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठता है कि जब नीट परीक्षा को लेकर देश में पहले से ही इतना बड़ा बवाल मचा हुआ है और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, तो फिर ऑनलाइन परीक्षाओं में इतनी बड़ी चूक और 50-50 लाख रुपये का कैश मिलना क्या साबित करता है? क्या देश में अब कोई भी परीक्षा सेफ नहीं बची है? बेंगलुरु की जिस प्राइवेट कंपनी को करोड़ों का टेंडर देकर परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने सिटिंग कैपेसिटी से दोगुने छात्रों को बुलाकर जो तमाशा किया, उसका खामियाजा आज वो गरीब छात्र भुगत रहे हैं जो सालों-साल देहाती इलाकों से आकर इस भर्ती की तैयारी करते हैं। अब देखना यह होगा कि यूपी एसटीएफ के इस बड़े खुलासे के बाद क्या सरकार इस परीक्षा को रद्द करेगी या फिर हमेशा की तरह लीपापोती कर दी जाएगी?

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