शुक्रवार को भी शेयर बाजार में बेचैनी, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले
कल की भारी गिरावट के बाद आज शुक्रवार, 13 मार्च को भारतीय शेयर बाजार ने भी कमजोरी के साथ शुरुआत की। निवेशकों की चिंता में बढ़ोतरी के पीछे ईरान युद्ध की बढ़ती घटनाएँ और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें प्रमुख कारण बनीं। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
सुबह 9:19 बजे सेंसेक्स लगभग 611.65 अंक (0.80%) गिरकर 75,422.77 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में 186.40 अंकों (0.79%) की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,452.75 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
गुरुवार को निवेशकों को भारी नुकसान
कल यानी 12 मार्च को भी बाजार में भारी दबाव रहा। सेंसेक्स 829.29 अंक गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ, जिससे एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति लगभग ₹2 लाख करोड़ कम हो गई। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भी इस बेचैनी में हिस्सेदारी निकाली और 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
मिडिल ईस्ट तनाव के चलते 23 लाख करोड़ का नुकसान
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों की खबरों ने सेंसेक्स को पिछले कुछ दिनों में 5,252 अंक (लगभग 6.46%) नीचे धकेल दिया है। इस दौरान लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 463 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 440 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। 27 फरवरी से अब तक निवेशकों की संपत्ति में कुल 23.44 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।
कच्चे तेल और एशियाई बाजारों का दबाव
भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड आज $98 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि कल यह $100 को पार कर चुका था। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का सीमित निकलना सप्लाई पर दबाव डाल रहा है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख जारी है। जापान का Nikkei 1.1%, साउथ कोरिया का Kospi 1.3% और ताइवान का बाजार लगभग 0.7% नीचे है। हांगकांग के शेयर बाजार में भी कमजोरी बनी हुई है।

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