होर्मुज में बारूदी हलचल: ट्रंप की नाकेबंदी से दुनिया में तेल का हाहाकार

वैश्विक राजनीति के अखाड़े से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है। दुनिया का सबसे बड़ा 'चोक पॉइंट' यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बारूद के ढेर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वो एलान कर दिया है जिससे पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया है, और वो एलान है.....'नाकाबंदी!' जी हां, समंदर के सीने पर अब अमेरिका ने अपनी दीवार खड़ी कर दी है। ट्रंप का सीधा संदेश है कि न ईरान का तेल बिकेगा, न उसकी फौज को पैसा मिलेगा। लेकिन उधर ईरान ने भी समंदर की लहरों पर मिसाइलें तान दी हैं और धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने रास्ता रोका, तो दुनिया को एक बूंद तेल नसीब नहीं होगा। ऐसे में सवाल है कि क्या हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं? क्या ट्रंप का ये एलान दुनिया को अंधेरे में धकेल देगी? आइए जानते हैं इस संग्राम की पूरी कहानी। 

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने चिर-परिचित अंदाज में धमाका करते हुए कहा है कि अमेरिकी नौसेना, जो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 'लोहे की दीवार' बन जाएगी। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि केवल उन जहाजों को रोका, तलाशा और वापस भेजा जाएगा जो ईरानी बंदरगाहों से आ और जा रहे हैं। गैर-ईरानी व्यापार को फिलहाल छूट दी गई है, लेकिन तनाव के साये में वहां से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इस धमकी को हल्के में नहीं लिया है। 

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ने सीधे अमेरिकी नागरिकों को चेतावनी दी। ईरान का सीधा तर्क है कि अगर उसका तेल नहीं बिका, तो वह होर्मुज के गेट बंद कर देगा। दुनिया का 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो ग्लोबल इकोनॉमी ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। वहीं ट्रंप के इस मास्टरप्लान का असली शिकार ईरान के साथ-साथ चीन भी है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान पर बहुत अधिक निर्भर है और हाल ही में खबर आई थी कि वे तेल के बदले चीनी युआन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अमेरिका ने इस 'पेट्रोडॉलर' को दी जा रही चुनौती को कुचलने के लिए ही यह नाकेबंदी की है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल पूरी अर्थव्यवस्था को हिला सकता है।

आपको बता दें बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा पूरी तरह अलर्ट पर है। USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और USS माइकल मर्फी जैसे विध्वंसक जहाज होर्मुज में बारूदी सुरंगें हटाने और पहरा देने के लिए उतर चुके हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पास दुनिया के सबसे खतरनाक सुसाइड ड्रोंस और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। रविवार को ही ईरानी नौसैनिकों ने अमेरिकी जहाजों को अंतिम चेतावनी देते हुए पीछे हटने पर मजबूर किया। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी संप्रभुता से खिलवाड़ हुआ तो वह अपनी पूरी ताकत झोंक देगा। इसलिए ट्रंप जानते हैं कि ईरान को जंग में हराने से बेहतर है उसे भूखा मारना। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही बदहाल है, उसकी लीडरशिप कमजोर हुई है और कई तेल संयंत्र तबाह हो चुके हैं। ऐसे में इस नाकेबंदी से ट्रंप चाहते हैं कि...

ईरान के पास हथियारों और प्रॉक्सी वॉर के लिए फंड न बचे।
ईरान के अंदर जनता का गुस्सा सरकार के खिलाफ भड़के।
ईरान झुककर अमेरिका की शर्तों पर नई संधि करने को तैयार हो जाए।

देखा जाए तो समंदर की लहरें आज खौफनाक तरीके से शांत हैं, लेकिन यह शांति किसी बड़े तूफान की आहट है। एक तरफ दुनिया का सबसे ताकतवर लोकतंत्र है, तो दूसरी तरफ अपनी अस्मत की जंग लड़ता एक इस्लामिक मुल्क। ट्रंप की यह नाकेबंदी सिर्फ जहाजों को नहीं रोकेगी, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, वैश्विक अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की उम्मीदों को भी रोक देगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन चुपचाप अपनी तेल सप्लाई कटते हुए देखेगा? क्या रूस इस खेल में कूदेगा? और सबसे बड़ा सवाल...क्या आज रात जब अमेरिकी जहाज होर्मुज के मुहाने पर खड़े होंगे, तब पहली गोली चलेगी? दुनिया सांसें रोककर कल की सुबह का इंतजार कर रही है। क्योंकि यह महज एक नाकेबंदी नहीं, बल्कि 21वीं सदी का सबसे बड़ा जुआ है। अगर यह दांव उल्टा पड़ा, तो पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाएगी। 

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