ईरान-अमेरिका जंग की पहली बलि: नेपाल में 2 दिन की छुट्टी, पाकिस्तान में ₹450 पार पेट्रोल!
दुनियाभर में ऊर्जा की लाइफलाइन कही जाने वाली होर्मुज जलसंधि पर ईरान के ताले ने दक्षिण एशिया में हाहाकार मचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस जंग ने तेल और गैस की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
भारत के पड़ोसी देश नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश इस वक्त अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकट से गुजर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि इन देशों में अब बिजली और पेट्रोल बचाने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। जी हां नेपाल ने तेल की खपत कम करने के लिए शनिवार और रविवार, यानी हफ्ते में 2 दिन की छुट्टी का ऐलान कर दिया है। सरकारी दफ्तर अब केवल सोमवार से शुक्रवार खुलेंगे। वहीं पैनिक बाइंग को रोकने के लिए गैस सिलेंडर आधे भरकर बेचे जा रहे हैं और सरकार अब पेट्रोल गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
वहीं श्रीलंका एक बार फिर 2022 जैसे आर्थिक पतन की कगार पर है। राष्ट्रपति ने बिजली की दरों में 40 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। सड़कों की लाइटें और बिलबोर्ड बंद कर दिए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम की वापसी हो गई है और वहां भी 4 दिन का कामकाजी हफ्ता लागू है। वहीं भारत ने संकट टालने के लिए श्रीलंका को 38,000 टन ईंधन की मदद भेजी है। दूसरी तरफ पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 43% बढ़कर 458.4 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, हालांकि विरोध के बाद इसमें मामूली राहत दी गई। सरकार ने दफ्तरों में 4 दिन का वर्किंग वीक कर दिया है और स्कूल बंद कर ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी गई हैं। लोगों को निजी वाहनों से बचाने के लिए 30 दिनों तक मुफ्त सार्वजनिक परिवहन की घोषणा की गई है।
वहीं अपनी 95% गैस और तेल की जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर बांग्लादेश ने सख्त कटौती लागू की है। शाम 6 बजे के बाद शॉपिंग सेंटर बंद करने के आदेश हैं और शादियों में सजावटी लाइटिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद कारखानों में उत्पादन रोक दिया गया है ताकि गैस बचाई जा सके।
आपको बता दें होर्मुज जलसंधि बंद होने का मतलब है दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा ठप हो जाना। अगर यह ब्लॉकेज ज्यादा दिन रहा, तो भारत के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत वर्तमान में अपनी रणनीतिक तेल भंडार और रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों के जरिए स्थिति को संभाले हुए है, लेकिन पड़ोसियों का संकट भारत के लिए एक बड़ा 'भू-राजनीतिक सिरदर्द' बनता जा रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में इन देशों में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा और गहरा सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह खुद को सुरक्षित रखते हुए अपने पड़ोसियों को डूबने से कैसे बचाए।


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