बार-बार का छोटा तनाव दे सकता है बड़ी बीमारी, ऐसे करें कंट्रोल

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में माइक्रो स्ट्रेस यानी छोटे-छोटे तनाव हमारी रोज़मर्रा की लाइफ का हिस्सा बन चुके हैं। ये तनाव देखने में मामूली लगते हैं जैसे काम का दबाव, समय की कमी, छोटी-छोटी बहस या लगातार जिम्मेदारियों का बोझ लेकिन जब इन्हें नजरअंदाज किया जाता है तो ये धीरे-धीरे मन और शरीर दोनों पर असर डालने लगते हैं। शुरुआत में इनका एहसास नहीं होता, लेकिन समय के साथ ये थकान, चिड़चिड़ापन और मानसिक दबाव में बदल सकते हैं।

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माइक्रो स्ट्रेस दरअसल उन छोटी परेशानियों का जमा हुआ असर है जो दिनभर में बार-बार होती रहती हैं। जब दिमाग को लगातार ऐसे सिग्नल मिलते हैं, तो शरीर भी उसे तनाव की तरह ही प्रतिक्रिया देता है। यही वजह है कि लंबे समय तक इन छोटी बातों को इग्नोर करना आगे चलकर बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह बन सकता है।

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इसके लक्षण भी धीरे-धीरे सामने आते हैं। व्यक्ति अक्सर बेचैन महसूस करता है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है, ध्यान लगाने में दिक्कत होती है और बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होती है। कई बार सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द या नींद न आना जैसी समस्याएं भी जुड़ जाती हैं। लगातार ऐसा होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो सकती है।

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कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है, खासकर वे जो हर काम को परफेक्ट तरीके से करना चाहते हैं या जिन पर काम का दबाव ज्यादा होता है। इसके अलावा जो लोग काम और निजी जीवन के बीच संतुलन नहीं बना पाते या जिनके पास खुद के लिए समय नहीं होता, उनमें माइक्रो स्ट्रेस जल्दी बढ़ सकता है। डिजिटल डिवाइस का ज्यादा इस्तेमाल और सोशल कनेक्शन की कमी भी इसे बढ़ाने वाले फैक्टर हैं।

माइक्रो स्ट्रेस को संभालने के लिए सबसे जरूरी है इसे पहचानना। दिनभर में कौन-सी चीजें आपको बार-बार परेशान कर रही हैं, इस पर ध्यान देना पहला कदम है। इसके बाद कुछ आसान आदतों को अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है जैसे जरूरत पड़ने पर ‘ना’ कहना, काम के बीच छोटे ब्रेक लेना, स्क्रीन टाइम कम करना और मेडिटेशन या ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना। अपने शौक के लिए समय निकालना और परिवार या दोस्तों के साथ जुड़े रहना भी मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

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इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेना, नियमित व्यायाम करना और दिनभर एक्टिव रहना भी जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि छोटे तनावों को मन में जमा न होने दें। समय रहते इन्हें समझकर और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके माइक्रो स्ट्रेस को आसानी से मैनेज किया जा सकता है, जिससे आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत बेहतर बनी रहती है।

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