उत्तर प्रदेश में चीनी कोटा घटा, किसानों की बढ़ी टेंशन

अप्रैल 2026 में सरकार ने घरेलू बाजार के लिए चीनी का मासिक कोटा घटाकर 23 लाख टन कर दिया है, जो पिछले साल और उससे पहले के मुकाबले कम है। इससे साफ है कि बाजार में मांग कमजोर हुई है। चालू सीजन के पहले सात महीनों में भी चीनी की खपत करीब तीन प्रतिशत घटकर 156 लाख टन रह गई है। यह गिरावट पूरे चीनी उद्योग के लिए एक अहम संकेत है।

राज्यवार देखें तो महाराष्ट्र को थोड़ा ज्यादा आवंटन मिला है, जबकि उत्तर प्रदेश के हिस्से में कमी आई है। कर्नाटक में हल्की बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश में कटौती को लेकर खास चिंता है, क्योंकि यह देश का बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है।

मिलों के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें अपने तय कोटे का कम से कम 90 प्रतिशत चीनी बाजार में भेजना जरूरी है। अगर वे ऐसा नहीं करतीं, तो अगले महीने उनका कोटा घटा दिया जाएगा। मार्च में थोड़ी राहत दी गई थी, लेकिन अप्रैल से फिर सख्ती शुरू हो गई है। अब पहले की बिक्री या बची हुई मात्रा का हिसाब भी नए कोटे में जोड़ा या घटाया जाएगा।

सरकार ने डिजिटल नियमों को भी कड़ा कर दिया है। सभी मिलों को अपने सिस्टम को सरकारी पोर्टल से जोड़ना और समय पर रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया है। जो मिलें यह काम तय समय तक नहीं करेंगी, उन्हें अगला कोटा नहीं मिलेगा। यानी अब डिजिटल अनुपालन सीधे उत्पादन और बिक्री से जुड़ गया है।

पैकेजिंग के नियम भी सख्त हैं। कानून के तहत 20 प्रतिशत चीनी जूट के बैग में पैक करना जरूरी है। इसका पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर देना होगा, नहीं तो इसे नियम उल्लंघन माना जाएगा।

मांग में गिरावट का असर गन्ना किसानों पर भी पड़ सकता है। जब मिलों की बिक्री धीमी होती है, तो उनके पास नकदी कम आती है और किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है। खासकर उत्तर प्रदेश में कोटा घटने से यह चिंता और बढ़ गई है।

वहीं, उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है, क्योंकि सरकार कीमतों को नियंत्रित करती है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार मांग कम रहना उद्योग के लिए खतरे की घंटी है और इसके कारणों को समझना जरूरी है।

आगे के लिए चीनी उद्योग को तीन बातों पर ध्यान देना होगा - डिजिटल नियमों का पूरी तरह पालन, घटती मांग के कारणों की पहचान और निर्यात के नए मौके तलाशना। क्योंकि यह उद्योग पूरी तरह सरकारी नीतियों पर निर्भर है, इसलिए इसमें होने वाला हर बदलाव सीधे पूरे सेक्टर को प्रभावित करता है।

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