नांदेड़ में सुखबीर बादल पर हमला, गुरमीत राम रहीम विवाद फिर सुर्खियों में
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला किए जाने की घटना से राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मच गई है। गुरुवार को करीब 1:45 बजे नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी मुकट परिसर में निहंग वेशभूषा में आए एक व्यक्ति ने सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला करने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हमलावर को काबू कर लिया।
हमले में सुखबीर बादल के हाथ में मामूली चोट आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। हमले के पीछे की वजह और आरोपी की मंशा को लेकर फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
पुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान 62 वर्षीय जसपाल सिंह के रूप में हुई है। वह मूल रूप से पुणे का रहने वाला बताया जा रहा है और पेशे से वकील रह चुका है। जानकारी के अनुसार वह पिछले करीब दो वर्षों से नांदेड़ के पास मुगत स्थित माता साहिब गुरुद्वारे में सेवा कर रहा था। पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
यह सुखबीर बादल पर हुआ दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी उन पर गोली चलाने की कोशिश की गई थी। उस समय सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से उनकी जान बच गई थी।
नांदेड़ की घटना के बाद सुखबीर बादल से जुड़े पुराने धार्मिक और राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख विवाद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़ा मामला है।
मई 2007 में गुरमीत राम रहीम के पंजाब के सलाबतपुरा में एक कार्यक्रम के दौरान पहनी गई वेशभूषा को लेकर सिख समुदाय के एक बड़े वर्ग ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से उनके खिलाफ धार्मिक आदेश जारी किया गया था।
विवाद वर्ष 2015 में फिर उस समय गहरा गया, जब श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से राम रहीम को माफी दिए जाने के फैसले पर सवाल उठे। इस पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन अकाली सरकार और सुखबीर सिंह बादल की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए। बाद में व्यापक विरोध के बीच यह माफी वापस ले ली गई।
सुखबीर बादल के खिलाफ 2015 के बेअदबी मामलों और कोटकपूरा तथा बहिबल कलां पुलिस फायरिंग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। बहिबल कलां गोलीकांड में दो सिख प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी।
30 अगस्त 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक कदाचार के मामले में तनखैया घोषित किया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में उन्हें धार्मिक सजा के तहत अलग-अलग गुरुद्वारों में सेवादारी, बर्तन साफ करने और पहरेदारी जैसी सेवाएं करने का निर्देश दिया गया था।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी नांदेड़ हमले की निंदा करते हुए पुराने मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक या राजनीतिक असहमति के बावजूद हिंसा को किसी भी स्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नांदेड़ में हुए हमले और सुखबीर बादल से जुड़े पुराने धार्मिक विवादों के बीच किसी सीधे संबंध का फिलहाल कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच के बाद ही हमले की वास्तविक वजह और आरोपी की मंशा स्पष्ट हो सकेगी।
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