शहीदों की याद में युवाओं का संकल्प: दोरनापाल से लद्दाख तक 2700 किमी की साइकिल यात्रा पर निकला युवा

सुकमा : नक्सल प्रभावित बस्तर की धरती से एक बार फिर देशभक्ति की ऐसी मिसाल सामने आई है, जो न केवल युवाओं को प्रेरित कर रही है, बल्कि शहीदों के प्रति सम्मान की नई परिभाषा भी गढ़ रही है। सुकमा जिले के दोरनापाल का युवा जगत मंडल 2700 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण साइकिल यात्रा पर निकल पड़ा है। उसका लक्ष्य है छत्तीसगढ़ के दोरनापाल से लेकर देश की उत्तरी सीमा पर बसे लद्दाख तक का सफर साइकिल से तय करना। यह यात्रा किसी रोमांच, रिकॉर्ड या प्रसिद्धि के लिए नहीं, बल्कि देश के शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। जगत मंडल का कहना है कि हम अक्सर शहीदों को केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर याद करते हैं, लेकिन उनका बलिदान हर दिन स्मरण किए जाने योग्य है। “जिन वीर जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, उन्हें याद रखना और उनके सपनों का भारत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है,” वह भावुक होकर कहता है। करीब छह महीने तक चलने वाली इस यात्रा में जगत मंडल विभिन्न राज्यों से होकर गुजरेगा। रास्ते में वह गांव-शहरों में लोगों से संवाद करेगा, युवाओं से मुलाकात करेगा और शहीदों के सम्मान में जागरूकता संदेश फैलाएगा। उसका उद्देश्य केवल खुद साइकिल चलाकर दूरी तय करना नहीं है, बल्कि हर पड़ाव पर लोगों के दिलों तक पहुंचना है। दोरनापाल जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्र से निकलकर लद्दाख तक की यह राह आसान नहीं है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, मौसम की मार, संसाधनों की कमी और लंबी दूरी हर कदम पर चुनौतियां सामने होंगी। लेकिन जगत का हौसला बुलंद है। सीमित साधनों के बावजूद उसने अपने संकल्प को मजबूत रखा है। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने उसे विदा करते समय शुभकामनाएं दीं और उसकी इस पहल पर गर्व जताया।

लद्दाख, जहां देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अनेक जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, वहां तक साइकिल से पहुंचकर वह उन शहीदों को नमन करेगा। उसके लिए यह यात्रा केवल शारीरिक परीक्षा नहीं, बल्कि आत्मिक साधना है। हर पैडल के साथ वह शहीदों की याद को अपने हृदय में संजोए आगे बढ़ रहा है। सुकमा, जो कभी केवल संघर्ष और नक्सल घटनाओं के लिए सुर्खियों में रहता था, आज उसी धरती से देशभक्ति और सकारात्मक बदलाव की कहानी लिखी जा रही है। जगत मंडल की यह पहल यह संदेश देती है कि बस्तर का युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि संकल्प और साहस से देश के लिए पहचान बना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की यात्राएं केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होतीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। युवाओं को अपने भीतर छिपी देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी को पहचानने का अवसर मिलता है।

जगत की यह साइकिल यात्रा आने वाले समय में निश्चित रूप से अनेक युवाओं को प्रेरित करेगी। जब वह दोरनापाल से लद्दाख तक की दूरी तय करेगा, तो यह केवल 2700 किलोमीटर की यात्रा नहीं होगी, बल्कि यह देश के कोने-कोने में शहीदों के सम्मान का संदेश पहुंचाने की एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पहल होगी।

दोरनापाल से लद्दाख तक का यह सफर एक युवा के संकल्प, साहस और देशभक्ति की मिसाल है जो बता रहा है कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं, कर्म से दी जाती है।

रिपोर्टर : चंद्रशेखर साहू 

 

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