अखंडनगर सीएचसी में करोड़ों की मशीन ‘ऑफ मोड’ पर, चार माह से बंद पीओसीटी बनी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक
सुल्तानपुर : अखंडनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जून माह में स्थापित की गई अत्याधुनिक पीओसीटी (Point of Care Testing) मशीन आज भी जस की तस पड़ी हुई है। धूल से ढकी, अनछुई और अनुपयोगी यह मशीन अब किसी तकनीकी उपकरण से अधिक प्रशासनिक उदासीनता और स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता का स्मारक बन चुकी है। लाखों रुपये की लागत से लाई गई इस मशीन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में त्वरित, सटीक और सस्ती जांच सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी न मशीन चालू हो सकी है और न ही इसे चालू करने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है।
कागजों में सुविधा, हकीकत में ठहराव
पीओसीटी मशीन के संचालन के लिए अलग पैथोलॉजी जांच भवन का निर्माण कराया जा रहा है। सरकारी बजट स्वीकृत हुआ, फाइलों में निर्माण कार्य शुरू दिखाया गया, लेकिन अगस्त के बाद से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर गायब हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि चार माह बीतने के बावजूद न तो ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, न कोई आर्थिक दंड लगाया गया और न ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई सामने आई है। यह स्थिति साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित उदासीनता की ओर इशारा करती है।
तकनीकी बहानों में उलझी व्यवस्था
सीएचसी के वर्तमान लैब कक्ष में पीओसीटी मशीन स्थापित नहीं की जा सकती। वजह बताई जा रही है कि मशीन अत्यधिक भारी है और वहां तक सुरक्षित शिफ्टिंग संभव नहीं है। इस संबंध में सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. सत्येंद्र का कहना है कि मशीन को दूसरे कक्ष में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है, लेकिन भवन का निर्माण अधूरा होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। यह बयान स्थिति स्पष्ट तो करता है, लेकिन साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है—
जब भवन अधूरा था, तब मशीन की आपूर्ति क्यों स्वीकार की गई?
क्या मशीन लगाने से पहले निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की गई थी?
भुगतान से पूर्व भवन की प्रगति और गुणवत्ता का सत्यापन हुआ या नहीं?
यदि नहीं, तो यह सीधी प्रशासनिक लापरवाही है और यदि हां, तो जानबूझकर आंख मूंदने का मामला।
सरकारी धन खर्च, परिणाम शून्य
पैथोलॉजी जांच भवन के लिए लाखों रुपये का सरकारी बजट स्वीकृत किया गया था। उद्देश्य था कि ग्रामीण मरीजों को बाहर भटकना न पड़े और जांच सुविधाएं सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध हों। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि न भवन पूरा है, न मशीन चालू और न ही कोई तय समयसीमा। यह मामला अब केवल अखंडनगर सीएचसी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
निजी लैबों पर निर्भर मरीज
सरकारी मशीन बंद होने के कारण स्थानीय मरीज आज भी सामान्य जांच के लिए निजी लैबों में जाने को मजबूर हैं, जहां अधिक खर्च, रिपोर्ट में देरी और गुणवत्ता पर संदेह बना रहता है। विडंबना यह है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक जांच मशीन मौजूद है, लेकिन केवल इसलिए बेकार पड़ी है क्योंकि ठेकेदार फरार है और व्यवस्था ने उसका पीछा करना जरूरी नहीं समझा।
चुप्पी के पीछे की सहमति?
चार माह तक ठेकेदार का गायब रहना और विभागीय अधिकारियों का मौन रहना किसी भी तरह से संयोग नहीं कहा जा सकता। यह चुप्पी इस आशंका को जन्म देती है कि या तो किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है या फिर जवाबदेही की पूरी व्यवस्था ही ढह चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पूरे प्रकरण में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई? क्या किसी फाइल पर दोषियों के नाम दर्ज हुए? या यह मामला भी समय के साथ कागजों में दफन कर दिया जाएगा?
जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला
पीओसीटी मशीन कोई सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि जीवन रक्षक जांचों का महत्वपूर्ण साधन है। इसे चार माह तक बंद रखना केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। अब आवश्यकता है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, फरार ठेकेदार के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और मशीन को अविलंब चालू कराया जाए। अन्यथा यह मामला केवल एक खबर नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक विफलता का स्थायी प्रतीक बनकर जनता में आक्रोश और अविश्वास को और गहरा करेगा
रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी


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