केवटली में ‘नाली पर राजनीति’: सफाई करने पर मुकदमा, दबंगई से जूझता गांव

सुलतानपुर :  केवटली गांव का मेन रोड तक जाने वाला एकमात्र रास्ता इन दिनों जलभराव और विवाद की भेंट चढ़ा है। ग्राम सभा की पक्की नाली मौजूद होने के बावजूद बीच रास्ते में डाले गए कूड़े-करकट से पानी रुक गया है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल है, बुजुर्ग और राहगीर फिसल रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान करने की बजाय गांव में तनातनी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार एक व्यक्ति ने केवल इतना किया कि इंटरलॉकिंग के किनारे जमा कचरा हटाकर पानी को ग्राम सभा की नाली तक पहुंचाने का प्रयास किया। आरोप है कि इसी दौरान एक महिला ने पहुंचकर इसका विरोध किया और कहा कि “इधर से पानी नहीं जाएगा।” स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर विवाद हुआ, वहां उक्त महिला का न तो मकान है और न ही दरवाजा, जबकि जिन घरों के सामने से नाली गुजरती है उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। गांव में चर्चा है कि विवाद खड़ा करने का मकसद केवल अपना दबदबा कायम रखना है। आरोप यह भी है कि मोहल्ले के कुछ युवक इस पूरे प्रकरण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और खुलेआम कहते नजर आ रहे हैं—“गांव में वही होगा जो हम चाहेंगे, देखते हैं कौन नाली साफ करता है।” बताया जाता है कि रास्ते में दोबारा कूड़ा डालकर पानी की निकासी रोकी गई, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन बाद में मारपीट के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया गया। अब सवाल उठ रहा है कि गांव की सुविधा के लिए सफाई का प्रयास करने वाला ही आरोपी क्यों बना, जबकि सार्वजनिक रास्ता बाधित करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में अच्छा कार्य करने वाला ही संदेह के घेरे में आ जाता है। क्या सार्वजनिक मार्ग की सफाई करना अपराध है? क्या दबंगई के दम पर पूरे गांव को परेशानी में डालना स्वीकार्य है?
प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रास्ते की तत्काल सफाई सुनिश्चित की जाए और यदि किसी ने जानबूझकर अवरोध खड़ा किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि गांव में कानून नहीं, बल्कि दबदबे की राजनीति चल रही

रिपोर्टर : जगन्नाथ मिश्र

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