योजनाओं की फाइलों में दबे हक: अखंड नगर की ‘रीता’ और ‘शीला’ आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर

सुल्तानपुर : सरकार जहां हर गरीब को पक्की छत देने का दावा कर रही है, वहीं विकासखंड अखंड नगर की ग्राम सभा भेलारा (चकधावा) से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के बावजूद दो पात्र महिलाएं आज भी जर्जर छप्पर के नीचे जीवन काटने को विवश हैं।
दिव्यांग रीता को नहीं मिला आवास
भेलारा निवासी रीता (पत्नी शिवपूजन राजभर) पैर से दिव्यांग हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
रीता का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान बलिराम राजभर से आवेदन और अनुरोध किया, लेकिन उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया।
रीता कहती हैं,
“हम पात्र हैं, फिर भी हमें योजना से बाहर रखा गया। बरसात में छप्पर टपकता है, परिवार के साथ रहना मुश्किल हो जाता है।”
शीला का आरोप: “मेरे घर की फोटो से दूसरों को मिली कॉलोनी”
इसी गांव की शीला (पत्नी सतई) का आरोप और भी गंभीर है। उनका कहना है कि उनके टूटे-फूटे घर की तस्वीर दिखाकर 25 अन्य लोगों की कॉलोनी पास कर दी गई, लेकिन उन्हें स्वयं लाभ नहीं मिला।
“मेरे पति बीमार रहते हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं। प्रधान कहते हैं मिल जाएगी कॉलोनी, लेकिन कब — यह कोई नहीं बताता।” — शीला
शीला ने ब्लॉक प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधिकारी गांव में आते तो हैं, लेकिन पंचायत भवन तक सीमित रहकर कागजी औपचारिकताएं पूरी कर लौट जाते हैं। जमीनी हकीकत देखने की कोशिश नहीं होती।
बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित राजभर बस्ती
राजभर बस्ती में सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि पक्के रास्ते जैसी मूलभूत सुविधा का भी अभाव है। कीचड़ और झाड़ियों से होकर ग्रामीणों को आवागमन करना पड़ता है।
स्थानीय निवासी प्रेमलता, चंद्रकला और सुदामा सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और मांग की:
पात्र महिलाओं को तत्काल आवास आवंटित किया जाए।
बस्ती के लिए पक्का रास्ता बनाया जाए।
आवास आवंटन की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रधान–सेक्रेटरी पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों ने प्रधान और पंचायत सचिव पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि ग्राम प्रधान ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि आवास पात्रता सूची शासन की गाइडलाइन के अनुसार तैयार होती है और किसी से कोई अवैध मांग नहीं की गई।
बीडीओ ने लिया संज्ञान, जांच का आश्वासन
मामला मीडिया में उठने के बाद खंड विकास अधिकारी शिव प्रकाश सिंह यादव ने कहा:
“मामला संज्ञान में आया है। पात्रता की जांच कराई जाएगी। यदि संबंधित महिलाएं पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें आवास उपलब्ध कराया जाएगा। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दे के बाद प्रशासन गंभीर हुआ है।
उठते सवाल
क्या जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी?
क्या योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचेगा?
या फिर फाइलों में दबे नाम यूं ही छप्पर के नीचे जिंदगी बिताते रहेंगे?
अब देखना यह है कि प्रशासन की कार्रवाई इन असहाय महिलाओं के लिए राहत साबित होती है या यह मामला भी कागजों में सिमटकर रह जाता है

रिपोर्टर : दिनेश सिंह अग्निवंशी

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