प्रधान बलिराम राजभर और सचिव की कथित मिलीभगत पर महिलाओं का मोर्चा,
सुल्तानपुर : भेलारा ग्राम सभा (चकधावा) की झोपड़पट्टी में रहने वाले गरीब परिवारों ने अब खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। गांव की कई महिलाओं ने ग्राम प्रधान बलिराम राजभर और पंचायत सचिव की कथित मिलीभगत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आवास योजना में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार द्वारा गरीबों को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही हैं, लेकिन झोपड़पट्टी में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंच रहा है। प्रधान–सचिव की कथित मिलीभगत के आरोप ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि आवास चयन सूची तैयार करने में प्रधान और सचिव ने मिलकर मनमानी की। पात्र परिवारों के नाम सूची से बाहर रखे गए, जबकि अन्य लोगों को लाभ दे दिया गया। दिव्यांग रीता (पत्नी शिवपूजन राजभर), जो अपने दो छोटे बच्चों के साथ जर्जर छप्पर में जीवन यापन कर रही हैं, ने आरोप लगाया कि आवास दिलाने के नाम पर उनसे ₹6000 लिए गए, लेकिन आज तक उन्हें पक्का मकान नहीं मिला। अन्य महिलाओं ने भी आरोप लगाया कि उनसे विभिन्न बहानों से धन की मांग की गई या केवल आश्वासन देकर टाल दिया गया। झोपड़पट्टी में बदहाल हालात
राजभर बस्ती की स्थिति बेहद दयनीय है। फूस और टीन के छप्परों के नीचे रहने वाले परिवार बरसात में भीगते हैं, सर्दी में ठिठुरते हैं और गर्मी में झुलसते हैं। छोटे-छोटे बच्चे कीचड़ और गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। कई परिवारों में कमाने वाला स्थायी सदस्य नहीं है, जिससे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से जुट पाती है। महिलाओं का कहना है कि जब सरकार गरीबों के लिए योजनाएं चला रही है, तो फिर उन्हें उनका अधिकार क्यों नहीं मिल रहा?
मीडिया के सवाल पर भड़के प्रधान
जब मीडिया ने इन आरोपों को लेकर प्रधान बलिराम राजभर से सवाल पूछा, तो वे नाराज हो गए और आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि आवास सूची शासन स्तर से तय होती है और उन्होंने किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की है। जांच और कार्रवाई की मांग महिलाओं ने एक स्वर में मांग की है कि: प्रधान और सचिव की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। कथित धन वसूली के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। पात्र गरीब परिवारों को तत्काल आवास दिया जाए। चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। मामला सामने आने के बाद विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) ने जांच के निर्देश दिए हैं। अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या झोपड़पट्टी में रहने वाले गरीब परिवारों को न्याय मिलेगा या फिर उनका सपना कागजों तक ही सीमित रह जाएगा
संवाददाता - दिनेश सिंह अग्निवंशी
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